
फरीदाबाद, 13 मई 2025:
हरियाणा के फरीदाबाद में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल लोगों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास की जड़ें समाज में कितनी गहरी हैं। एक महिला ने तांत्रिक के बहकावे में आकर अपने ही दो साल के बेटे को नहर में फेंक दिया, यह मानकर कि वह ‘सफेद जिन्न का बच्चा’ है जो पूरे परिवार का विनाश कर देगा।
यह दिल दहला देने वाली घटना फरीदाबाद के बीपीटीपी पुल के पास स्थित आगरा नहर की है, जहां एक महिला अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर पहुंची और फिर उसे नहर में धक्का दे दिया। गनीमत रही कि कुछ राहगीरों की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने तुरंत उसे पकड़कर पुलिस को सूचना दी।
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घटना का पूरा घटनाक्रम: मासूम को बताया 'जिन्न का बेटा'
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान मेघा लुकरा के रूप में हुई है, जिसकी शादी 16 साल पहले कपिल लुकरा से हुई थी। दंपति के दो बच्चे हैं—14 वर्षीय बेटी मान्या और दो वर्षीय बेटा तन्मय उर्फ रोनिक।
परिवार फरीदाबाद की सैनिक कॉलोनी में एक फ्लैट में रहता है।
कपिल लुकरा ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी पिछले कुछ समय से एक तांत्रिक महिला मीता भाटिया के संपर्क में थी, जो खुद को तांत्रिक विद्या की जानकार बताती है। मीता ने मेघा को यह यकीन दिलाया कि उसका छोटा बेटा जिन्न का अवतार है, जो उसके परिवार को तबाह कर देगा।
धीरे-धीरे, मेघा मानसिक रूप से असंतुलित होती चली गई और उसने तांत्रिक के कहने पर बेटे को मारने का निर्णय ले लिया।
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रविवार की शाम: जब मां बनी राक्षस
रविवार शाम करीब 5 बजे मेघा अचानक अपने बेटे को लेकर घर से निकल गई। कपिल ने बताया कि बिना बताए घर से निकली मेघा का फोन भी बंद था। जैसे ही उन्होंने देखा कि बेटा और पत्नी दोनों घर में नहीं हैं, उन्होंने इधर-उधर पूछताछ शुरू की।
इसी बीच खबर आई कि बीपीटीपी पुल के पास एक महिला को राहगीरों ने बच्चे को नहर में फेंकते हुए देखा है और उसे पुलिस को सौंप दिया गया है।
जब कपिल थाने पहुंचे तो अपनी पत्नी को देखकर चौंक गए। पुलिस ने उन्हें बताया कि महिला ने स्वीकार किया है कि उसने तांत्रिक के कहने पर बेटे को नहर में फेंका क्योंकि वह उसे जिन्न मानती थी।
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स्थानीय लोगों ने बचाई जान, तांत्रिक हिरासत में
घटना के वक्त मौके पर मौजूद कुछ राहगीरों ने महिला को बच्चे को नहर में फेंकते देखा। उन्होंने तुरंत शोर मचाया और 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मेघा को हिरासत में ले लिया और राज्य आपदा प्रबंधन, दमकल विभाग और स्थानीय गोताखोरों की टीम को बच्चे की तलाश में लगा दिया गया।
साथ ही, तांत्रिक मीता भाटिया को भी हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, मीता ने कई बार मेघा को मानसिक रूप से प्रभावित किया और तंत्र-मंत्र के नाम पर उसके दिमाग में ये बात बैठा दी कि बच्चा जिन्न है। अब जांच में ये भी पता लगाया जा रहा है कि मीता के संपर्क में और कितने लोग हैं और क्या वह किसी संगठित धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा है।
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मानसिक स्वास्थ्य और अंधविश्वास—दोहरी लड़ाई
यह घटना सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अंधविश्वास के टकराव की भी एक गंभीर तस्वीर है।
आज भी भारत के कई हिस्सों में लोग मानसिक समस्याओं को समझने के बजाय तांत्रिकों और ओझाओं की शरण में जाते हैं। यह घटना बताती है कि एक शिक्षित महिला भी अंधविश्वास में इस कदर डूब सकती है कि वह मातृत्व जैसे पवित्र रिश्ते को भी तिलांजलि दे देती है।
पुलिस का कहना है कि मेघा की मानसिक स्थिति की मनोचिकित्सकीय जांच करवाई जाएगी, ताकि पता लगाया जा सके कि वह किसी मनोरोग से पीड़ित थी या पूरी तरह तांत्रिक प्रभाव में थी।
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फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल, पुलिस ने महिला के खिलाफ धारा 302 (हत्या की कोशिश), 307 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, बच्चे की तलाश नहर में जारी है, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सर्च ऑपरेशन में कठिनाई आ रही है।
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि टीम हर संभव प्रयास कर रही है और जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) को भी बुलाया जा सकता है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सामाजिक कार्यकर्ताओं और मनोविश्लेषकों का कहना है कि यह मामला बताता है कि हमें मानसिक स्वास्थ्य और अंधविश्वास के खिलाफ सतर्कता बढ़ानी होगी।
समाज में इस तरह की घटनाएं तभी रुक सकती हैं जब लोग तर्क, विज्ञान और चिकित्सा पर भरोसा करें, न कि अंधभक्ति और अंधविश्वास पर। इसके लिए स्कूल स्तर से जागरूकता कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण और साइकोलॉजिकल हेल्थ को प्राथमिकता देनी होगी।
फरीदाबाद की यह घटना एक चेतावनी है—अंधविश्वास सिर्फ एक सोच नहीं, बल्कि वह जहर है जो रिश्तों को खत्म कर देता है। जब मां अपने ही बच्चे को मार दे, तो समाज को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसे तांत्रिकों पर कठोर कार्रवाई हो और समाज को जागरूक किया जाए कि धोखेबाज बाबाओं से सावधान रहें, और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से मानसिक परामर्श लें।