
वसीम कुरेशी सांची, मध्य प्रदेश: रविवार का दिन ऐतिहासिक नगरी सांची के लिए एक अविस्मरणीय पल लेकर आया, जब यहाँ की गलियाँ और चौराहे राष्ट्र चेतना और स्वदेशी के मधुर जयघोष से गूंज उठे। मौका था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक अत्यंत भव्य और अनुशासित पथ संचलन का, जिसने नगर में एकता, अनुशासन और समरसता का अद्भुत संदेश प्रसारित किया।
सैकड़ों की संख्या में, पारंपरिक पूर्ण गणवेश धारण किए हुए RSS के स्वयंसेवक, अपने कंधों पर लाठी (दंड) लिए, दृढ़ संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े। उनकी चाल में न केवल अनुशासन की झलक थी, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और संगठनात्मक शक्ति का एक सजीव प्रदर्शन भी था। यह पथ संचलन केवल एक मार्च नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति के ज्वार का प्रतीक था, जिसने हर नागरिक को देश की सेवा के लिए प्रेरित किया।
रामलीला मैदान से हुआ शक्ति प्रदर्शन का शंखनाद
इस गरिमामय आयोजन का शुभारंभ रामलीला मैदान से हुआ। संचलन से पूर्व यहाँ शस्त्र पूजन का विधिवत कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसने भारतीय संस्कृति में शौर्य और शक्ति के महत्व को रेखांकित किया। इसके पश्चात, स्वयंसेवकों ने सामूहिक एवं एकल राष्ट्रगीत और बौद्धिक सत्र के माध्यम से पूरे वातावरण को राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कर दिया।
बौद्धिक सत्र में वक्ताओं ने विभिन्न राष्ट्रहित के मुद्दों पर गहन विचार-मंथन प्रस्तुत किया। इसमें संयुक्त परिवार प्रणाली को मजबूत करने, सामाजिक समरसता स्थापित करने और स्वदेशी जीवनशैली को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण जैसे वैश्विक विषय से लेकर आतंकवाद, लव जिहाद और विदेशी सांस्कृतिक प्रभावों से राष्ट्र को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि एक आत्मनिर्भर भारत का निर्माण स्वदेशी संकल्प और मजबूत आंतरिक एकता से ही संभव है।
हर कदम पर पुष्प वर्षा, हर हृदय में राष्ट्रभाव
जैसे ही दो-दो की कतार में सुव्यवस्थित स्वयंसेवक संचलन के लिए अग्रसर हुए, सांची की पूरी नगरी मानो एक उत्सव के रंग में रंग गई। संचलन ने नगर के मुख्य बाजार, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए एक विशाल वृत बनाया।
रास्ते भर, नगर के नागरिकों ने स्वयंसेवकों का भव्य स्वागत किया। हर गली और चौराहे पर नागरिकों ने, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने, पुष्पवर्षा कर इस पथ संचलन का सम्मान किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक रंगोली बनाकर मार्गों को सजाया, मानो हर घर, हर दहलीज इस राष्ट्रभाव से सराबोर उत्सव का एक सक्रिय हिस्सा बन गई हो। नागरिकों का यह अपार समर्थन इस बात का प्रमाण था कि RSS का संदेश सांची के जन-जन तक पहुँच चुका है।
संगठन की शक्ति और समर्पण का संदेश
संचलन की समाप्ति पुनः रामलीला मैदान पर हुई। इस पूरे आयोजन में एक बात स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रही थी— सांची नगरी के हर हृदय में स्वदेशी की चेतना, हर नेत्र में संगठन की शक्ति और हर कदम में राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण की भावना हिलोरें ले रही थी।
यह भव्य पथ संचलन मात्र एक ड्रिल नहीं था, बल्कि एक शक्तिशाली संदेश था कि राष्ट्रनिर्माण की यात्रा में अनुशासन, संगठनात्मक एकता और स्वदेशी का संकल्प ही वह आधारशिला हैं, जिन पर एक सशक्त और समर्थ भारत का निर्माण संभव है। RSS के स्वयंसेवकों ने यह सिद्ध कर दिया कि उनकी कदमताल केवल ज़मीन पर नहीं, बल्कि आने वाले सशक्त भारत की नींव पर पड़ रही है। इस आयोजन ने सांची में एक नई ऊर्जा, एक नई चेतना और राष्ट्र के प्रति एक नए समर्पण का संचार कर दिया है। यह पथ संचलन आने वाले दिनों में युवा पीढ़ी को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।