
जालौन जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंदों को सिर छुपाने की छत देने का सपना, कुछ लोगों की लापरवाही और धोखाधड़ी के चलते विवादों में आ गया है। प्रशासन अब ऐसे 215 लाभार्थियों पर शिकंजा कसने जा रहा है, जिन्होंने योजना के तहत पहली और दूसरी किश्त तो ले ली, लेकिन घर बनाने का नाम तक नहीं लिया।
डूडा विभाग की जांच में सामने आया कि कई लोगों ने घर बनाने की रकम को घरेलू खर्च और अन्य जरूरतों में उड़ा दिया। अब प्रशासन ने 210 जवाबदेह लोगों को आरसी जारी कर ₹2.6 करोड़ की वसूली का ऐलान कर दिया है।
डूडा अधिकारी अनुज पालीवाल ने बताया, "जिन लोगों ने इस योजना का दुरुपयोग किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि उन लोगों के हक पर चोट है, जो वाकई छत के लिए तरस रहे हैं।"
"घर नहीं बने, लेकिन जिम्मेदारी से बचने की कोशिश जारी"
पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत तीन किश्तों में धनराशि दी जाती है। लेकिन इन 215 लोगों ने इसे अपने घर के बजाय दूसरे खर्चों पर उड़ाने को तरजीह दी। विभाग ने इन्हें पहले नोटिस भेजा, फिर चेतावनी दी, लेकिन 210 लोगों ने कोई जवाब देने की जरूरत नहीं समझी।
अब प्रशासन ने आरसी जारी कर सख्ती दिखाने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि जब तक इनसे पैसा वापस नहीं लिया जाएगा, नए जरूरतमंदों को आवास का लाभ नहीं मिल सकेगा।
"सपनों के घर की जगह जिम्मेदारियों का बोझ"
आखिर क्यों लोगों ने ऐसा किया? यह सवाल हर किसी के मन में है। कुछ ने इसे मजबूरी बताया, तो कुछ ने इसे अपनी योजना मान लिया। लेकिन अब इस लापरवाही की कीमत चुकाने का वक्त आ गया है।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता का सवाल उठाता है, बल्कि समाज के उन असली जरूरतमंदों के दर्द को भी उजागर करता है, जिन्हें आज भी सिर छुपाने के लिए छत का इंतजार है।