ग्वालियर: सरकारी दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करना अब ग्वालियर में कुछ कर्मचारियों को भारी पड़ गया है। जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड रूम के दो कर्मचारियों और एक वादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह मामला शासन के हितों के साथ धोखाधड़ी और सरकारी रिकॉर्ड को नष्ट करने से जुड़ा है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्वालियर की तहसील ग्रामीण के अंतर्गत ग्राम महू की जमीन का एक दीवानी मामला व्यवहार न्यायालय में चल रहा है। इस प्रकरण में शासन के हितों को दरकिनार कर कुछ सरकारी कर्मचारी और वादी धर्मवीर मिलकर खेल खेल रहे थे। मिलीभगत का खुलासा तब हुआ जब प्रशासनिक अधिकारियों ने गहराई से पड़ताल की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने न केवल दस्तावेजों में हेराफेरी की, बल्कि खसरा पंजी के पन्ने तक फाड़ डाले।
पटवारी पहले ही हो चुका है सस्पेंड
इस पूरे प्रकरण की कड़ी का पहला सिरा पटवारी कुलदीप चाहर से जुड़ा था। जांच में पाया गया कि न्यायालय में शासन का पक्ष रखने के बजाय पटवारी ने वादी धर्मवीर के दस्तावेजों का बिना मिलान किए समर्थन किया। इतना ही नहीं, प्रभारी अधिकारी को जो रिकॉर्ड सौंपे जाने थे, उनमें भी जानबूझकर लापरवाही बरती गई। इस गंभीर अनियमितता के तुरंत बाद प्रशासन ने पटवारी कुलदीप चाहर को सस्पेंड कर दिया था।
रिकॉर्ड रूम में रची गई गहरी साजिश
मामले की परतें जैसे-जैसे खुलती गईं, वैसे-वैसे साजिश का दायरा बढ़ता गया। अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया कि रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह और भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन दोनों ने वादी धर्मवीर के साथ सांठ-गांठ की और शासकीय रिकॉर्ड में मनमाने बदलाव किए। जो दस्तावेज सरकारी धरोहर थे, उन्हें नष्ट करने या गायब करने की कोशिश की गई, ताकि अदालत में वादी को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।
प्रशासन का सख्त रुख: “बख्शे नहीं जाएंगे दोषी”
जिला प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह, भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह और वादी धर्मवीर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ या शासन के हितों के विरुद्ध कोई भी कदाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। इस कार्रवाई से उन सभी कर्मचारियों को कड़ा संदेश मिला है जो मिलीभगत कर सरकारी फाइलों को 'दांव' पर लगाने की फिराक में रहते हैं।
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