करैरा/नरवर: राजनीति में अक्सर नेताजी को 'जनता का सेवक' कहा जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के करैरा विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। नरवर में आयोजित विधायक की जनचौपाल में जब एक फरियादी अपनी गुहार लेकर पहुँचा, तो विधायक रमेश खटीक ने जो जवाब दिया, उसने हड़कंप मचा दिया। विधायक ने दो टूक कह दिया, "तुम मेरे विधानसभा क्षेत्र के नहीं हो, किसी और के पास जाओ।"
इस बेरुखी से नाराज एक पिता ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया कि वहां मौजूद हर कोई सन्न रह गया। गुस्से में तमतमाए पिता ने अपने मासूम बच्चे को विधायक की कार के गर्म बोनट पर बिठा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल में आग की तरह फैल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
नरवर तहसील में विधायक रमेश खटीक ने एक जनचौपाल का आयोजन किया था। इलाके की समस्याओं के समाधान के दावे के साथ शुरू हुई इस चौपाल में बड़ी संख्या में लोग अपनी फरियाद लेकर पहुँचे। इसी दौरान, पोहरी विधानसभा क्षेत्र के कुछ ग्रामीण भी अपनी समस्याएं लेकर वहाँ पहुँच गए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे भले ही पोहरी विधानसभा के निवासी हैं, लेकिन वे नरवर तहसील के अंतर्गत आते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि विधायक जी उनकी समस्याओं को सुनेंगे और समाधान करेंगे। लेकिन जैसे ही विधायक महोदय के सामने यह बात आई कि ग्रामीण पोहरी क्षेत्र से हैं, उनका लहजा बदल गया।
'मेरे क्षेत्र के नहीं, तो सुनवाई नहीं'
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विधायक रमेश खटीक ने ग्रामीणों की फरियाद सुनने के बजाय उन्हें यह कहकर टालने की कोशिश की कि वे उनके क्षेत्र के नहीं हैं। इस पर ग्रामीणों ने तर्क दिया कि वे इसी तहसील के निवासी हैं, लेकिन विधायक अपनी बात पर अड़े रहे।
यह सुनते ही वहां मौजूद एक ग्रामीण का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने विधायक के इस रवैये को अपनी और क्षेत्र की जनता की बेइज्जती माना। विरोध दर्ज कराने के लिए उस शख्स ने हद पार कर दी और अपने छोटे से बच्चे को उठाकर विधायक की खड़ी गाड़ी के बोनट पर रख दिया। जिस समय बच्चे को बोनट पर रखा गया, कार धूप में खड़ी होने के कारण काफी गर्म थी।
वायरल वीडियो और सियासत
इस पूरे हंगामे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक पिता अपने बच्चे को बोनट पर रखकर विधायक के प्रति नाराजगी जता रहा है। लोग इस घटना को लेकर विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या जनसेवक के लिए जनता की समस्याओं का समाधान करने की कोई सीमा होती है? क्या प्रशासनिक सीमाओं के नाम पर एक फरियादी को खाली हाथ लौटाना उचित है? फिलहाल, इस मामले पर विधायक की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने करैरा की राजनीति में एक नई बहस को जन्म जरूर दे दिया है।
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