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गैरतगंज में रोंगटे खड़े करने वाला हत्याकांड: गड़ा धन पाने के लिए तांत्रिक ने ली जान

14-07-2026  Editor Shubham Jain  20 views
गैरतगंज में रोंगटे खड़े करने वाला हत्याकांड: गड़ा धन पाने के लिए तांत्रिक ने ली जान

विदिशा भारती, डेस्क। गैरतगंज थाना क्षेत्र से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अंधविश्वास और 'दफीना' (गड़ा धन) हासिल करने की अंधी लालसा में एक मासूम व्यक्ति की बेरहमी से बलि दे दी गई। इस वीभत्स हत्याकांड का खुलासा होते ही हर कोई स्तब्ध है। पुलिस ने तांत्रिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

बलि की पटकथा: जब अंधविश्वास बना मौत का कारण

घटना की शुरुआत 9 जुलाई 2026 को हुई, जब 42 वर्षीय विजय जैन के अचानक लापता होने की सूचना परिजनों ने पुलिस को दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमशुदगी दर्ज की और छानबीन शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों से पूछताछ के बीच 13 जुलाई 2026 को पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली। ग्राम परासिया के पास नदी किनारे मिट्टी में दबा हुआ एक शव मिला, जिसके हाथ-पैर बाहर निकले हुए थे। परिजनों ने शव की पहचान मृतक के कपड़ों, मोबाइल और उनकी कृत्रिम आंख के जरिए विजय जैन के रूप में की।

'धरती गरम हो रही है': तांत्रिक का खौफनाक झूठ

एसपी आशुतोष गुप्ता के मार्गदर्शन में एसडीओपी सोनाली गुप्ता के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने जब कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो आरोपी प्रहलाद साहू का चेहरा बेनकाब हो गया। प्रहलाद ने बताया कि वह खुद को तांत्रिक बताता था और मृतक विजय के साथ अक्सर गड़ा धन निकालने की बातें किया करता था।

7 जुलाई की रात, प्रहलाद ने अपने साथी करीम खान और टीकम साहू के साथ मिलकर विजय को परासिया नदी के पास बुलाया। वहां उसने नाटक करते हुए कहा, "धरती गरम हो रही है, दफीना बलि मांग रहा है!" तांत्रिक के इस खौफनाक झूठ के बाद, तीनों ने मिलकर विजय को दबोच लिया और कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने शव को नदी किनारे गड्ढा खोदकर दफना दिया।

पुलिस की मुस्तैदी और आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने इस 'अंधे कत्ल' की गुत्थी को महज कुछ ही दिनों में सुलझा लिया। मुख्य आरोपी प्रहलाद साहू, टीकम साहू और करीम खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी, फावड़ा, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में निरीक्षक डी.पी. लोहिया, राजीव उइके, सुनंदा खरे और उनकी पूरी टीम का अहम योगदान रहा। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया है, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

समाज के लिए सबक

यह घटना बताती है कि आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास किस कदर समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। 'गड़ा धन' और 'तांत्रिक अनुष्ठान' के नाम पर की गई यह हत्या इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध तांत्रिक क्रिया या अंधविश्वास के झांसे में न आएं और ऐसी गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें।


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