लटेरी। क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित हो रहे बूचड़खानों और मीट की दुकानों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य एवं कामधेनु आयोग के अध्यक्ष राम रघुवंशी के एक दिवसीय दौरे के दौरान लटेरी और सिरोंज क्षेत्र में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मुरवास और सिरोंज में अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों को सील कर दिया गया।
- मुरवास में अवैध बूचड़खाना सील
सोमवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे राम रघुवंशी ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान लटेरी तहसील के मुरवास में अवैध रूप से संचालित हो रहे एक बूचड़खाने पर टीम ने दबिश दी। नियमों के विपरीत और बिना अनुमति के चल रहे इस बूचड़खाने को प्रशासन ने मौके पर ही सील कर दिया। मुरवास के बाद कार्रवाई का यह सिलसिला सिरोंज पहुंचा। यहाँ निरीक्षण के दौरान भारी अनियमितता पाए जाने पर प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए
तीन मीट की दुकानों को सील कर दिया।
- शहर के एक बड़े बूचड़खाने पर ताला लगवाते हुए उसे पूरी तरह सील कर दिया।
राम रघुवंशी सदस्य, जीव-जंतु कल्याण बोर्ड ने कहा पशु क्रूरता और अवैध बूचड़खानों का संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारी इन अवैध गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे। कार्रवाई की भनक लगते ही पूरे क्षेत्र में खलबली मच गई। दुकानों और बूचड़खानों के सील होने की खबर फैलते ही मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। दिनभर चली यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का मुख्य विषय बनी रही।
- ग्लोबल एनिमल लॉ और पीटा जैसी वैश्विक संस्थाएं अक्सर विकासशील देशों में पशु क्रूरता निवारण कानूनों के लचर क्रियान्वयन पर चिंता जताती रही हैं। ऐसे में भारत सरकार के केंद्रीय बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा स्वयं जमीन पर उतरकर, पुलिस बल के साथ अवैध बूचड़खानों को बंद कराना यह प्रमाणित करता है कि भारत अब कागजी कानूनों से आगे बढ़कर कड़े प्रशासनिक क्रियान्वयन के युग में प्रवेश कर चुका है। पशुओं के प्रति क्रूरता और अवैध बूचड़खानों का संचालन केवल एक स्थानीय अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण, जैव-सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के खिलाफ वैश्विक खतरा है। भारत सरकार देश के कोने कोने में गौवंश और सभी मूक प्राणियों के संरक्षण के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। विदिशा में की गई यह कार्रवाई तो बस एक शुरुआत है, पूरे देश में ऐसे माफियाओं के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।
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