सीधी/विदिशा: मध्यप्रदेश के सीधी जिला न्यायालय परिसर में सोमवार की दोपहर जो कुछ हुआ, उसे देखकर लोग हक्के-बक्के रह गए। न्याय के मंदिर में उस समय हड़कंप मच गया जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने जिला अभियोजन अधिकारी (DPO) राजकुमार रावत को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप कर लिया। भ्रष्टाचार के इस मामले में आरोपी अधिकारी की भागने की कोशिश किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी।
रिश्वत ली, पैसे फेंके और 'फरार' होने की कोशिश
मिली जानकारी के मुताबिक, फरियादी पंकज तिवारी ने शिकायत की थी कि एक कानूनी मामले में कार्रवाई के बदले डीपीओ राजकुमार रावत उनसे रिश्वत मांग रहे हैं। लोकायुक्त की टीम पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाकर बैठी थी। जैसे ही फरियादी ने नोट थमाए, टीम ने घेराबंदी शुरू कर दी। खुद को घिरता देख आरोपी डीपीओ ने घबराहट में रुपयों की गड्डी सड़क किनारे फेंक दी और वहां से नौ-दो-ग्यारह होने की कोशिश की। लेकिन लोकायुक्त के जांबाज अधिकारियों ने दौड़ लगाकर उसे दबोच लिया।
मैदान में 'केमिकल टेस्ट' और हड़कंप
आरोपी को पकड़ने के बाद लोकायुक्त टीम ने मौके की नजाकत देखते हुए उसे खुले मैदान में ही रोक लिया। वहां मौजूद लोगों और वकीलों की भीड़ के सामने उसके हाथों की रासायनिक जांच (Chemical Test) की गई। जैसे ही हाथ पानी में डाले गए, वे लाल हो गए—साबूत मिल चुका था। न्यायालय परिसर में इस कार्रवाई को लेकर घंटों गहमागहमी बनी रही। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो अधिकारी कानून का पाठ पढ़ाता है, वही भ्रष्टाचार के दलदल में इतना धंसा हुआ है।
बाद में टीम आरोपी को लेकर सीधी सर्किट हाउस पहुंची, जहां देर शाम तक कार्रवाई जारी रही।
क्या है पूरा मामला?
फरियादी पंकज तिवारी ने बताया कि जिस केस में रिश्वत मांगी जा रही थी, उसका कनेक्शन 2025 के एक पुराने मामले से है। खास बात यह है कि उस पुराने मामले में मझौली थाने के तत्कालीन एसआई कमलेश त्रिपाठी भी लोकायुक्त द्वारा पहले ही ट्रैप किए जा चुके हैं। मामला जब कोर्ट पहुंचा, तो अभियोजन अधिकारी ने अपनी 'जेब गर्म' करने के लिए नया खेल शुरू कर दिया।
'विदिशा भारती' की नजर: कानून के रक्षक ही बने भक्षक!
रीवा लोकायुक्त के टीआई एस.एस. मरावी ने पुष्टि की है कि आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या न्याय के मंदिरों में बैठे ये 'साहब' कभी सुधरेंगे? जनता का भरोसा इन संस्थाओं पर बना रहे, इसके लिए ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
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