दतिया,मध्यप्रदेश: दतिया उपचुनाव के रण में अब सियासी तापमान अपने चरम पर है। भाजपा के लिए यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि साख बचाने की बड़ी अग्निपरीक्षा बन गया है। टिकट वितरण के बाद मचे सियासी घमासान और कार्यकर्ताओं के भीतर पनपी नाराजगी को भांपते हुए, अब भाजपा आलाकमान ने 'डैमेज कंट्रोल' मोड ऑन कर लिया है। पार्टी की नैया पार लगाने के लिए अब खुद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दतिया की ज़मीन पर उतर आए हैं।
रत्तन रॉयल में मंथन: दिग्गजों का जमावड़ा
दतिया के होटल 'रतन रॉयल' में आयोजित भाजपा की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और प्रभारी मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना जैसे दिग्गज नेता एक मंच पर जुटे हैं। बैठक का सीधा एजेंडा एक ही है—अपनों के भीतर के 'विद्रोह' को थामना और संगठन को फिर से एकजुट करना।
क्यों मची है दतिया में हलचल?
उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही दतिया भाजपा में असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों में फैली नाराजगी ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी थी। कार्यकर्ताओं के बीच संवादहीनता और जमीनी असंतोष का लाभ विपक्ष न उठा ले, इसी डर से प्रदेश नेतृत्व ने मोर्चा संभाल लिया है। सूत्रों की मानें तो बैठक में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने और पार्टी की पुरानी जड़ों को फिर से मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
क्या 'खंडेलवाल फॉर्मूला' काम करेगा?
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का दतिया दौरा महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश है। नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि चुनाव के दौरान अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रदेश संगठन के दिग्गज नेता नाराज कार्यकर्ताओं के 'मान-मनौव्वल' में सफल हो पाएंगे? क्या यह डैमेज कंट्रोल मिशन भाजपा को दतिया में फिर से वही पुरानी ताकत दिला पाएगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का चुनाव भाजपा के लिए किसी 'लिटमस टेस्ट' से कम नहीं है। यदि संगठन समय रहते अपनी बिखरी हुई टीम को समेटने में सफल रहता है, तो मुकाबला रोमांचक होगा। लेकिन अगर अंदरूनी कलह जारी रही, तो राह काफी कठिन हो सकती है।
निगाहें अब जनता और कार्यकर्ताओं पर
अगले कुछ दिनों में दतिया की सियासी तस्वीर और साफ हो जाएगी। फिलहाल तो होटल रतन रॉयल में चल रही बैठकों का दौर जारी है। भाजपा का पूरा जोर 'मिशन विजय' पर है, लेकिन असली परीक्षा तो बूथ स्तर पर होने वाले मतदान के दिन ही होगी।
दतिया की सियासत किस करवट बैठेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात तय है—भाजपा ने अपनी पूरी ताकत दतिया में झोंक दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता और नाराज कार्यकर्ता इस 'डैमेज कंट्रोल' को कितना स्वीकार करते हैं।
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