अमरकंटक/विदिशा: मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी अमरकंटक एक बार फिर सुर्खियों में है। राम मंदिर चंदा चोरी के चर्चित मामले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पुष्पराजगढ़ के विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने ट्रस्ट के कामकाज और आर्थिक पारदर्शिता को लेकर बड़ा हमला बोला है, जिससे स्थानीय राजनीति में भूचाल आ गया है।
आखिर कहां जा रहा है भक्तों का चढ़ावा?
विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के प्रबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया है कि आखिर ट्रस्ट के पास आने वाला करोड़ों का चढ़ावा और दान राशि किन मदों में खर्च की जा रही है? विधायक ने कहा कि यदि ट्रस्ट का खजाना भरा हुआ है, तो फिर अमरकंटक आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना क्यों पड़ता है?
‘दिखावे की रंगाई-पुताई तक सीमित है ट्रस्ट?’
विधायक मार्को ने ट्रस्ट की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए इसे 'दिखावे की संस्कृति' करार दिया है। उन्होंने सवाल किया, “क्या नर्मदा मंदिर ट्रस्ट का कार्य केवल नर्मदा जयंती के भव्य आयोजनों और मंदिर की रस्म अदायगी वाली रंगाई-पुताई तक ही सीमित है? अगर नहीं, तो फिर विकास की जमीनी तस्वीर गायब क्यों है?”
उनका साफ तौर पर मानना है कि ट्रस्ट को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी और उन कार्यों पर पैसा खर्च करना होगा जो सीधे तौर पर तीर्थयात्रियों की सुविधा से जुड़े हों।
पारदर्शिता की मांग, जवाब का इंतजार
विधायक ने मांग की है कि ट्रस्ट को अपनी आय और व्यय (Income & Expenditure) का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि उनके द्वारा दिए गए दान का पाई-पाई का उपयोग कहां हो रहा है।
अमरकंटक में मची खलबली:
इस बयान के बाद से पूरे क्षेत्र में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं का एक बड़ा वर्ग पारदर्शिता की मांग का समर्थन कर रहा है, वहीं ट्रस्ट प्रबंधन के खेमे में भी खामोशी छा गई है। अब हर किसी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्ट इस पर कोई औपचारिक जवाब देगा या फिर यह मामला और तूल पकड़ेगा।
विदिशा भारती की विशेष टिप्पणी:
धार्मिक स्थलों की पवित्रता और वहां की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता किसी भी ट्रस्ट का मुख्य कर्तव्य होता है। विधायक का यह बयान केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि उन भक्तों की आवाज भी है जो उम्मीद करते हैं कि उनका दान भगवान की सेवा और भक्तों की सुविधा के लिए खर्च हो। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रस्ट इस 'आर्थिक अग्निपरीक्षा' में खरा उतर पाएगा।
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