दतिया: मध्य प्रदेश की सियासत में 'संकटमोचक' और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम ही काफी है। दतिया उपचुनाव की बिसात बिछ चुकी है और भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच, भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित एक कार्यकर्ता बैठक में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का रौद्र रूप देखने को मिला। मंच से कार्यकर्ताओं को जोश भरने के साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन को लेकर जो तीखे तेवर दिखाए, उसने दतिया की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
"मैं भूलने वाला नहीं, याद रखने वाला हूँ"
दतिया भाजपा कार्यालय में आयोजित विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी। जोश से लबरेज कार्यकर्ताओं के बीच जब डॉ. मिश्रा ने माइक संभाला, तो उनका अंदाज चिर-परिचित आक्रामक शैली वाला था। उन्होंने मंच से पुलिस प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे उन दिनों को भूले नहीं हैं, जब कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ था और आंसू गैस के गोले दागे गए थे।
डॉ. मिश्रा ने तल्ख लहजे में कहा, "मैं भूलने वाला व्यक्ति नहीं हूं, मैं याद रखने वाला व्यक्ति हूं। मैं दोस्ती भी याद रखता हूं और दुश्मनी भी।" उनके इस बयान के बाद सभागार
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि उपचुनाव के दौरान प्रशासनिक सख्ती का मुद्दा भाजपा के लिए कितना अहम होने वाला है।
कार्यकर्ताओं से की 'मिशन मोड' में काम करने की अपील
अपने संबोधन में डॉ. मिश्रा ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूँकते हुए कहा कि अब समय व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठने का है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को भारी मतों से विजयी बनाने का मंत्र दिया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने सारे गिले-शिकवे भुलाकर एकजुट हो जाएं और जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर जाएं।
बैठक में मौजूद सभी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में दतिया उपचुनाव को पूरी मजबूती से जीतने का संकल्प लिया। कार्यकर्ताओं के बीच दिख रहा उत्साह भाजपा की बढ़ती पकड़ को बयां कर रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज
डॉ. नरोत्तम मिश्रा के इस तीखे बयान ने दतिया के चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुलिस प्रशासन के खिलाफ उनका यह कड़ा रुख सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने और विपक्षी दलों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। दतिया के उपचुनाव में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके इस 'याद रखने वाले' बयान का असर वोटिंग के दिन क्या रंग दिखाता है।
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