सांची: विश्व धरोहर नगरी सांची के बाशिंदों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले काफी समय से पानी की किल्लत और सुस्त रफ्तार सीवरेज प्रोजेक्ट से जूझ रहे नगरवासियों की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। नगर परिषद की सक्रियता और वरिष्ठ अधिकारियों के कड़े रुख के बाद अब अर्बन कंपनी के काम में तेजी आने के आसार दिख रहे हैं।
एक्शन मोड में दिखे एडीएस दिव्यांक सिंह, ग्राउंड जीरो पर की पड़ताल
नगर में चल रही जल प्रदाय और सीवरेज परियोजनाओं की कछुआ चाल को लेकर जनता में भारी असंतोष था। इसी बीच, नगरीय विकास एवं आवास विभाग (MPUDC) के अतिरिक्त प्रबंध संचालक दिव्यांक सिंह ने सांची का तूफानी दौरा किया। उन्होंने केवल फाइलों में काम नहीं देखा, बल्कि तपती धूप में प्रोजेक्ट के हर एक पॉइंट का सूक्ष्म निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान श्री सिंह ने जल प्रदाय परियोजना के डिजाइन और तकनीकी बारीकियों को परखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि "काम में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।" उन्होंने ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि समय-सीमा के भीतर काम पूरा करें ताकि जनता को घर-घर शुद्ध पेयजल मिल सके।
सीवरेज प्लांट का भी लिया जायजा: गंदगी से मिलेगी निजात
केवल पानी ही नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के प्रस्तावित स्थल का भी अधिकारियों ने दौरा किया। सीवरेज प्रोजेक्ट के अटकने से शहर की सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम पर बुरा असर पड़ रहा था।
“ये परियोजनाएं केवल बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि सांची के नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने का जरिया हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
— दिव्यांक सिंह, अतिरिक्त प्रबंध संचालक
जनप्रतिनिधि और प्रशासन की जुगलबंदी
नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम और उनकी टीम लगातार शासन-प्रशासन पर दबाव बनाए हुए थी कि ठप पड़े कार्यों को गति दी जाए। निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता आनंद सिंह, परियोजना प्रबंधक सुबोध जैन, और सीएमओ रामलाल कुशवाहा भी मौजूद रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को जनसमस्याओं से रूबरू कराया और प्रोजेक्ट में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की।
क्या हैं सांची की मुख्य चुनौतियां?
सांची जैसे पर्यटन स्थल पर पानी की सुचारू व्यवस्था और आधुनिक सीवरेज सिस्टम का होना अनिवार्य है। वर्तमान में:
अर्बन कंपनी के काम की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे।
खुदी हुई सड़कों और अधूरे पाइपलाइन जाल से लोग परेशान हैं।
पर्यटन सीजन से पहले बुनियादी सुविधाओं का दुरुस्त होना जरूरी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के इस दौरे ने सोए हुए सिस्टम में जान फूंक दी है। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर यह निर्देश कितनी जल्दी 'नल के जल' में तब्दील होते हैं।
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