रीवा। मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा (MPPSC) की शुचिता और चयन प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। ताजा मामला रीवा कलेक्ट्रेट में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर सुरभि जैन से जुड़ा है। उनके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र की सत्यता पर सवाल खड़े होने के बाद अब जिला प्रशासन ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021-22 की MPPSC परीक्षा के दौरान आरक्षण का लाभ लेने के लिए डिप्टी कलेक्टर सुरभि जैन ने कथित तौर पर गलत तथ्यों के आधार पर EWS प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। शिकायत में दावा किया गया है कि सुरभि जैन के परिवार की कुल चल-अचल संपत्ति सरकार द्वारा निर्धारित EWS मानकों (सालाना 8 लाख से कम आय और निश्चित भूमि सीमा) से कहीं अधिक है।
जैसे ही यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन और विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
छतरपुर से जुड़े हैं तार
चूंकि डिप्टी कलेक्टर का मूल निवास और पारिवारिक संपत्ति का विवरण छतरपुर जिले से संबंधित बताया जा रहा है, इसलिए रीवा प्रशासन ने छतरपुर जिला प्रशासन से भी संपर्क साधा है। वहां के राजस्व रिकॉर्ड और तहसीलदार द्वारा जारी मूल प्रमाणपत्र की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रमाणपत्र जारी करते समय आय और संपत्ति का विवरण सही दिया गया था या नहीं।
डिप्टी कलेक्टर का पक्ष: ‘आरोप निराधार’
दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों पर डिप्टी कलेक्टर सुरभि जैन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने नियमानुसार ही आवेदन किया था और जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
अगर जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो यह न केवल एक पद का सवाल होगा, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा देगा। क्या रसूख के दम पर आरक्षण के नियमों के साथ खिलवाड़ किया गया? या फिर यह किसी निजी रंजिश का परिणाम है? इसका जवाब प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट में ही मिलेगा।
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