वसीम कुरेशी रायसेन रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। एक सप्ताह से लाइन में खड़े किसानों ने भोपाल जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 45 पर चक्काजाम कर दिया। बारिश में भीगती मूंग की फसल और सर्वेयर की अवैध वसूली से परेशान होकर किसानों ने यह कदम उठाया। टोल प्लाजा के पास लगे इस जाम से राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
आप इस खबर में जानेंगे कि कैसे एक विवादित वेयरहाउस में खरीदी केंद्र बनाकर किसानों को परेशानी में डाला गया।
1. एक सप्ताह से इंतजार, 3 दिन से बारिश में भीग रही फसल
रायसेन जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। इस बारिश ने मूंग उत्पादक किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। किसान अपनी ट्रॉलियों में मूंग लेकर वेयरहाउस के सामने खड़े हैं। उदयपुरा के मनसा वेयरहाउस के बाहर किसान एक सप्ताह से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
बीते 3 दिनों से लगातार हो रही बारिश में किसानों की बोरी में रखी मूंग भीग चुकी है। खुले आसमान के नीचे खड़ी उपज खराब हो रही है। किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्र पर तुलाई के कांटे बहुत कम हैं। कम कांटे होने के कारण तुलाई की गति बहुत धीमी है। इस धीमी प्रक्रिया की वजह से सैकड़ों ट्रॉलियां सड़क किनारे खड़ी हैं।
2. 150 रुपये प्रति क्विंटल की मांग और 2 किलो की अतिरिक्त कटौती
किसानों के सब्र का बांध तब टूटा जब उनसे सीधी वसूली की मांग की गई। किसानों ने आरोप लगाया कि मनसा वेयरहाउस के मालिक और सर्वेयर मिलकर खुली लूट चला रहे हैं।
तुलाई के बदले किसानों से 150 रुपये प्रति क्विंटल की रिश्वत मांगी जा रही है। इसके साथ ही नमी के नाम पर प्रति क्विंटल 2 किलो मूंग ज्यादा ली जा रही है।
किसानों ने बताया कि अगर वे 150 रुपये नहीं देते, तो सर्वेयर उनकी मूंग को रिजेक्ट कर देता है या नमी का बहाना बनाकर लौटा देता है। इस दोहरी मार से परेशान होकर किसानों ने तुलाई बंद कराई और सड़क पर उतर आए।
3. नेशनल हाईवे 45 पर लगा लंबा जाम
गुस्साए किसानों ने दोपहर में मनसा वेयरहाउस के पास टोल प्लाजा के निकट नेशनल हाईवे 45 पर धरना दे दिया। किसानों ने बीच सड़क पर अपनी ट्रॉलियां और वाहन खड़े कर दिए।
भोपाल से जबलपुर जाने वाला और जबलपुर से भोपाल आने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हाईवे पर यात्री बसों, ट्रकों और निजी कारों की कतारें लग गईं। घंटे भर से ज्यादा समय तक लगे इस जाम में आम यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसान सड़क पर बैठकर प्रशासन और वेयरहाउस प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका कहना है कि मेहनत से उगाई फसल को इस तरह लुटने नहीं देंगे।
4. विवादित मनसा वेयरहाउस को क्यों दी गई खरीदी की अनुमति?
किसानों ने स्थानीय प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उदयपुरा का मनसा वेयरहाउस पहले से ही विवादित रहा है। पिछले सत्रों में भी यहाँ गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं।
इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसी वेयरहाउस को मूंग खरीदी केंद्र बनाने की अनुमति दे दी। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों की सांठगांठ के बिना यह धांधली संभव नहीं है। विवादित स्थल पर खरीदी केंद्र बनाने से अव्यवस्था पहले दिन से बनी हुई है।
5. प्रशासन का संवेदनहीन रवैया: तहसीलदार ने मांगा सबूत
जब इस पूरे मामले पर मीडिया ने उदयपुरा तहसीलदार से बात की, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा।
तहसीलदार ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि आप इस बात का सबूत लेकर आइए कि सर्वेयर ने 150 रुपये मांगे हैं।
अधिकारी के इस बयान से किसान और ज्यादा भड़क गए। किसानों का कहना है कि रिश्वत मांगते समय कोई रसीद नहीं दी जाती। वे खुलेआम पैसे मांगते हैं। किसान अपनी फसल बचाएं, लाइन में खड़े रहें या रिश्वत मांगने का वीडियो और सबूत जुटाएं? प्रशासन की इस कार्यशैली से साफ दिखता है कि उन्हें किसानों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।
6. किसानों की स्पष्ट मांगें
राष्ट्रीय राजमार्ग पर डटे किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
मनसा वेयरहाउस से भ्रष्ट सर्वेयर को तुरंत हटाया जाए।
150 रुपये प्रति क्विंटल रिश्वत मांगने वालों पर प्राथमिकी दर्ज हो।
नमी के नाम पर कटने वाली 2 किलो की अवैध कटौती बंद हो।
तुलाई के कांटों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए ताकि किसानों को दिनों तक इंतजार न करना पड़े।
बारिश से भीग चुकी मूंग की तुलाई बिना किसी शर्त के की जाए।
खरीदी केंद्रों पर किसानों का शोषण चरम पर है। अगर जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेकर समाधान नहीं निकाला, तो यह विरोध पूरे रायसेन जिले में फैल सकता है
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