वसीम कुरैशी रायसेन
सांची जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी सामने आई है। पिछले एक साल में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा। इस दौरान कुल 417 शिकायतें दर्ज की गईं। मामले बढ़ता देख जनपद प्रशासन हरकत में आया है। पिछले 20 दिनों में विशेष अभियान चलाकर लगभग 200 शिकायतों का समाधान किया गया।
जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पूजा जैन ने खुद कमान संभालते हुए शिकायतों की समीक्षा शुरू की है। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम बनाकर शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क साधा जा रहा है। समस्या समाधान के बाद पोर्टल से शिकायतें हटाई जा रही हैं।
आवास, राशन और पेंशन की समस्याएं सबसे आगे
ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने पर पोर्टल का सहारा लिया। अधिकांश शिकायतएं पंचायत स्तर की छोटी समस्याओं से जुड़ी हैं।
निराकरण की समीक्षा में यह बात सामने आई कि ग्रामीण मुख्य रूप से चार योजनाओं के लिए परेशान थे:
मुख्यमंत्री आवास योजना: मकान निर्माण की किश्तें रुकना और नाम जुड़ने में देरी।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन: बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन स्वीकृत न होना।
गरीबी रेखा (BPL) राशन कार्ड: पात्रता सूची में नाम न जुड़ना।
शासकीय योजनाएं: समय पर स्वीकृत राशि का खाते में न पहुंचना।
ग्राम पंचायत स्तर पर सुनवाई न होने के कारण लोग सीधे भोपाल स्थित हेल्पलाइन पर कॉल कर रहे थे।
भादनेर पंचायत में सबसे ज्यादा असंतोष
सांची क्षेत्र की भादनेर ग्राम पंचायत शिकायतों के मामले में शीर्ष पर रही। यहां के निवासियों ने स्थानीय अमले की लापरवाही के खिलाफ सबसे अधिक कॉल किए।
भादनेर में आवास योजना के आवेदन लंबित रहने और पंचायत भवन नियमित न खुलने की बातें सामने आईं। प्रशासन ने इस पंचायत पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। पंचायत सचिव और रोजगार सहायक को नोटिस जारी कर सभी पेंडिंग आवेदनों की स्थिति मांगी गई है।
20 दिन का विशेष अभियान, 200 शिकायतें बंद
सीईओ पूजा जैन ने शिकायतों के ढेर को खत्म करने के लिए कार्ययोजना तैयार की। पिछले तीन सप्ताह से प्रतिदिन ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली जा रही है।
कार्रवाई की मुख्य बातें:
पंचायत सचिवों को सीधे शिकायतकर्ताओं के घर भेजा गया।
मौके पर जाकर आवेदनों का सत्यापन किया गया।
कागजी औपचारिकताएं पूरी कराकर लाभार्थियों के नाम स्वीकृत किए गए।
संतुष्टि मिलने के बाद आवेदक की सहमति से पोर्टल बंद कराया गया।
इस प्रक्रिया से 20 दिनों के भीतर 200 से अधिक मामले हल हुए। शेष 217 शिकायतों का निराकरण चालू हफ्ते में पूरा करने का लक्ष्य है।
पंचायत सचिवों को सख्त हिदायत, गैरहाजिरी पर होगी कार्रवाई
प्रशासनिक ढील पर लगाम लगाने के लिए जनपद स्तर से नए निर्देश जारी हुए हैं। पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को दैनिक उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश दिया गया है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा जैन के अनुसार:
“ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को भटकना न पड़े, इसके लिए सख्त कदम उठाए हैं। सचिवों को कार्यदिवसों में अनिवार्य रूप से पंचायत भवन में उपस्थित रहना होगा। यदि निरीक्षण के दौरान कोई सचिव अनुपस्थित मिला या कार्य में लापरवाही सामने आई, तो उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।”
सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग तेज
जनपद पंचायत ने सभी ग्राम पंचायतों में योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जांचने के लिए पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। पंचायत भवनों पर सरकारी योजनाओं के डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इनमें आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और जिम्मेदार अधिकारी का फोन नंबर अंकित रहेगा।
इस कदम का उद्देश्य लोगों को स्थानीय स्तर पर जानकारी देना है, ताकि उन्हें हेल्पलाइन का रुख न करना पड़े। रोजगार सहायकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पात्र हितग्राहियों के फॉर्म स्वयं भरकर जमा कराएं।
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