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सागौन के हरे वृक्षों पर चली कुल्हाड़ी, मुहम्मदगढ़ बीट में वन माफिया बेखौफ

11-08-2026  Vidisha Raghvendra dangi  35 views
सागौन के हरे वृक्षों पर चली कुल्हाड़ी, मुहम्मदगढ़ बीट में वन माफिया बेखौफ

विदिशा भारती एक्सक्लूसिव

सोशल मीडिया एडिटर: रितेंद्र अहिरवार

ग्यारसपुर। एक तरफ सरकार "एक पेड़ मां के नाम" जैसे अभियानों से हर नागरिक को पौधरोपण का संदेश दे रही है। दूसरी तरफ ग्यारसपुर वनक्षेत्र में सागौन के कीमती वृक्षों की अंधाधुंध कटाई जारी है। वन माफिया बिना किसी डर के हरियाली पर कुल्हाड़ी चला रहे हैं। पूरी घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

मेन रोड किनारे खुलेआम कटाई

ताजा मामला हैदरगढ़ के अंतर्गत आने वाली मुहम्मदगढ़ बीट का है। गणेश मंदिर के ऊपर सतपतरी मेन रोड के बिल्कुल किनारे सागौन के पेड़ों को काटा गया है। सड़क किनारे हो रही इस कटाई से विभाग की गश्त व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े होते हैं। दिन के उजाले में व्यस्त मार्ग के पास पेड़ कटते रहे और जिम्मेदार अमला सोता रहा।

पुरानी लापरवाही और साठगांठ की आशंका

मुहम्मदगढ़ बीट में अवैध कटाई का यह पहला मामला नहीं है। इस क्षेत्र से लगातार वनों के कटाव की खबरें आती रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बीट गार्ड और निचले अधिकारियों की अनदेखी से माफिया के हौसले बुलंद हैं। लगातार होती कटाई से जाहिर है कि गश्त केवल कागजों तक सीमित है।

'फिनिशिंग और PR' में उलझा महकमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल मीडिया एडिटर रितेंद्र अहिरवार ने डिप्टी रेंजर मुकेश शर्मा से फोन पर बात की। डिप्टी मुकेश शर्मा ने सफाई दी कि मौके पर फिनिशिंग करवाकर पीआर जारी की जा रही है और तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

अब सवाल उठता है कि विभाग की नींद हमेशा पेड़ कटने के बाद ही क्यों खुलती है? अगर निगरानी सख्त है तो माफिया बेखौफ होकर मुख्य सड़क के पास पेड़ कैसे काट लेते हैं? क्या अधिकारियों का खौफ खत्म हो चुका है?

कागजी दावों और जमीनी हकीकत का अंतर

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि बेशकीमती सागौन की लकड़ी तस्करों के हाथों बिक रही है। पेड़ कटने के बाद केवल पंचनामा बनाना समस्या का हल नहीं है।

जनता अब सख्त कदम देखना चाहती है। क्या वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे? या फिर हर बार की तरह मामला कागजी खानापूर्ति तक सिमट जाएगा? वन संपदा आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। इसकी रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाने होंगे।


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