विदिशा भारती विशेष रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के देवास जिले के बागली से भ्रष्टाचार की एक बड़ी खबर सामने आई है। उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने बागली क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। यह रिश्वत प्रधानमंत्री आवास योजना की तीसरी किश्त जारी करने और जियो टैगिंग करने के नाम पर मांगी गई थी।
लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से पंचायत महकमे में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस अभियान में लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला
बागली तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत में फरियादी सलीम शाह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन किया था। शासन की नियमावली के अनुसार सलीम शाह के खाते में योजना की पहली और दूसरी किश्त की राशि ट्रांसफर की जा चुकी थी।
मकान का निर्माण आगे बढ़ाने के लिए तीसरी किश्त जारी होना बाकी थी। नियम के मुताबिक तीसरी किश्त की राशि जारी करने से पहले निर्माण कार्य की जियो टैगिंग करना अनिवार्य होता है।
ग्राम पंचायत सचिव ओमप्रकाश सारन ने इस जियो टैगिंग की प्रक्रिया को पूरा करने और तीसरी किश्त की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में फरियादी सलीम शाह से 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। फरियादी पहले ही आर्थिक रूप से परेशान था, इसलिए उसने रिश्वत देने के बजाय लोकायुक्त पुलिस उज्जैन से संपर्क करने का फैसला किया।
लोकायुक्त की टीम ने बिछाया जाल
सलीम शाह ने पूरे मामले की लिखित शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक उज्जैन को दी। शिकायत की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी सचिव को पकड़ने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की।
योजना के तहत फरियादी सलीम शाह को रसायनों (फिनॉल्पथलीन पाउडर) लगे नोट देकर पंचायत भवन भेजा गया। जैसे ही फरियादी ने पंचायत भवन के अंदर सचिव ओमप्रकाश सारन को 5,000 रुपये दिए, पहले से घात लगाकर बैठी लोकायुक्त टीम ने दबिश दे दी।
लोकायुक्त डीएसपी उज्जैन और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर सचिव को रंगे हाथ धर दबोचा। टीम ने जब सचिव के हाथ धुलवाए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का ठोस सबूत था कि उसने रिश्वत के नोट छुए थे।
पंचायत भवन में मचा हड़कंप
कार्रवाई के दौरान पंचायत भवन में मौजूद अन्य कर्मचारियों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोकायुक्त की टीम ने तुरंत नोटों की जब्ती की और आवश्यक कागजी कार्रवाई शुरू कर दी।
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व लोकायुक्त डीएसपी उज्जैन ने किया। उनके साथ टीम के अन्य निरीक्षक और पुलिस बल के जवान मौजूद थे। लोकायुक्त अधिकारियों ने पंचायत भवन के रिकॉर्ड को भी जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार पर लगाम जरूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब और बेघर परिवारों को पक्का मकान देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस योजना का मुख्य मकसद हर गरीब को छत प्रदान करना है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की बदनीयती के कारण लाभार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जियो टैगिंग और किश्त जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बागली की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर रिश्वतखोरी अब भी जारी है। गरीब लाभार्थियों से उनकी हक की किश्त जारी करने के लिए भी पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
लोकायुक्त की इस त्वरित कार्रवाई ने ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है जो गरीबों के हक पर डाका डालते हैं।
आगे की कानूनी कार्रवाई
पकड़े गए पंचायत सचिव ओमप्रकाश सारन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। लोकायुक्त पुलिस टीम आरोपी के संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी सचिव के निलंबन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। जिला पंचायत सीईओ ने मामले की रिपोर्ट तलब की है।
आम नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ उठायें आवाज
यदि आपसे भी किसी सरकारी काम, योजना की किश्त या प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगी जाती है, तो चुप न रहें। आप सीधे अपने नजदीकी लोकायुक्त कार्यालय या आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आपकी एक सजग शिकायत ऐसे भ्रष्ट तंत्र को साफ करने में मदद कर सकती है।
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