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जबलपुर में 'डेंटिस्ट' का खतरनाक खेल: हिंदू नाम रखकर फंसाया प्रेमजाल

29-06-2026  Editor Shubham Jain  70 views
जबलपुर में 'डेंटिस्ट' का खतरनाक खेल: हिंदू नाम रखकर फंसाया प्रेमजाल

जबलपुर: मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं। यहाँ के एक निजी डेंटल क्लीनिक में डॉक्टर बनकर बैठा एक युवक असल में वह नहीं था, जिसका वह ढोंग कर रहा था। नाम 'राजकुमार', काम डॉक्टर का, लेकिन मंशा कुछ और ही! इस कथित डेंटिस्ट के भंडाफोड़ ने समाज में सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जबलपुर के मदन महल थाना क्षेत्र स्थित 'डेंटल स्क्वायर' क्लीनिक में एक युवक लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रहा था। क्लीनिक में उसका नाम 'राजकुमार' बताया गया था। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जब परतें खुलीं तो पता चला कि यह युवक डेंटिस्ट नहीं, बल्कि सैयद इसाक असरार है। उसने अपनी असली पहचान छुपाकर अस्पताल में नौकरी हासिल की थी।

प्रेमजाल का जाल और धोखे की दास्तान

आरोप है कि सैयद इसाक ने हिंदू नाम का मुखौटा पहनकर न केवल नौकरी हासिल की, बल्कि अपनी बातों से मासूम युवतियों को अपने प्रेमजाल में भी फंसाया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने अब तक कम से कम तीन युवतियों को अपना शिकार बनाया है। वह इन युवतियों को शादी का झांसा देकर भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करता था।

ऐसे हुआ भंडाफोड़

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब कोलकाता की रहने वाली एक पीड़िता ने मदन महल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे भी अपना हिंदू नाम बताया था। जब उसे सच्चाई का पता चला और आरोपी की प्रताड़ना बढ़ी, तो उसने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

सुरक्षा पर सवाल, जांच शुरू

इस घटना ने शहर के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या किसी अस्पताल ने डॉक्टर के मूल प्रमाण पत्रों की जांच नहीं की थी? कैसे एक बाहरी व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ वर्षों तक प्रैक्टिस करता रहा? पुलिस अब आरोपी के फर्जी दस्तावेजों और उसके नेटवर्क के बारे में विस्तृत पूछताछ कर रही है।

सतर्क रहें और सावधान रहें

यह मामला हमें सचेत करता है कि डिजिटल और वास्तविक दुनिया में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा करना कितना महंगा पड़ सकता है। पहचान छुपाकर इस तरह के कृत्य करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा भी है। 'विदिशा भारती' अपने पाठकों से अपील करती है कि अपने आस-पास होने वाली ऐसी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और समय रहते अधिकारियों को सूचित करें।

पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे के और भी राज जल्द ही सबके सामने आएंगे।


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