आकाश धाकड़ विदिशा: अक्सर कहा जाता है कि 'शादी-विवाह में खुशियां चार गुना हो जाती हैं', लेकिन विदिशा के बरईपुरा काछी मोहल्ला स्थित लवकुश नगर में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक घर जहाँ बारात की शहनाइयां बज रही थीं, वहीं चंद पलों में ही चीखों-पुकार और मातम पसर गया। शादी की रस्मों के बीच हुई 'हर्ष फायरिंग' एक परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए लील गई।
क्या है पूरा मामला?
मृतक राकेश सेन, जो अपने बड़े भांजे की शादी में शामिल होने के लिए विदिशा आए थे, क्या जानते थे कि यह बारात उनके जीवन का अंतिम सफर बन जाएगी। शादी के उत्साह के बीच, जब बारात निकल रही थी, तभी जश्न के नाम पर 'हर्ष फायरिंग' का दौर शुरू हुआ। इस दौरान आरोपी भांजे 'अन्नी' के हाथ में मौजूद देसी कट्टे से अचानक गोली चल गई।
यह गोली सीधे राकेश सेन को जा लगी। गोली इतनी सटीक और घातक थी कि राकेश को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। देखते ही देखते शादी का माहौल गमगीन हो गया और खुशियां मातम में बदल गईं। शादी में आए मेहमानों में अफरा-तफरी मच गई और जश्न का माहौल चीख-पुकार में तब्दील हो गया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
घटना की सूचना मिलते ही विदिशा कोतवाली थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी भांजे 'अन्नी' को हिरासत में ले लिया है और उस पर हत्या से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
कोतवाली पुलिस के अनुसार, अब जांच का मुख्य केंद्र यह है कि आखिर यह देसी कट्टा शादी समारोह में कहाँ से आया? क्या यह अवैध था या किसी और के नाम पर था? इन सभी बिंदुओं पर पुलिस गहनता से जांच कर रही है। कानून के जानकार बताते हैं कि हर्ष फायरिंग के दौरान लापरवाही बरतना अपने आप में एक गंभीर अपराध है, और जब इसमें किसी की जान चली जाए, तो मामला और भी जटिल हो जाता है।
क्या सिर्फ 'हर्ष' के लिए जान देना जरूरी है?
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा आईना है। आए दिन शादियों में अपनी शान-ओ-शौकत दिखाने के लिए लोग असलहों का प्रदर्शन करते हैं। क्या यह 'हर्ष' वास्तव में किसी के जीवन से ज्यादा कीमती है? कानूनन हर्ष फायरिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है, बावजूद इसके लोग इसे अपनी रईसी और रसूख का जरिया मानते हैं। विदिशा की यह दुखद घटना एक बार फिर से इस बात को पुख्ता करती है कि बंदूक का प्रदर्शन कभी भी उत्सव का हिस्सा नहीं हो सकता, यह सिर्फ मौत को दावत देने जैसा है।
पूरा इलाका इस समय सदमे में है। एक भांजे की शादी में मामा की अर्थी उठना नियति का कैसा क्रूर खेल है, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। प्रशासन अब इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि इस अवैध हथियारों के खेल के पीछे किसका हाथ है।
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