आकाश धाकड़ विदिशा: विदिशा पुलिस ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी का लोहा मनवाया है। साल 2025 में शहर को झकझोर देने वाले 3 साल की मासूम बच्ची के अपहरण और पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की सशक्त पैरवी का ही नतीजा है कि आरोपी को अब अगले 7 साल जेल की चारदीवारी के भीतर काटने होंगे।
क्या था पूरा मामला?
यह सनसनीखेज घटना वर्ष 2025 की है। शहर के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत एक विवाह समारोह का आयोजन चल रहा था। खुशियों का यह माहौल अचानक मातम और चिंता में बदल गया, जब एक 3 वर्षीय मासूम बच्ची अचानक लापता हो गई। परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अपराध क्रमांक 120/2025 दर्ज किया। इसमें अपहरण की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
पुलिस की 'टेक्निकल' जांच और कामयाबी
इस संवेदनशील मामले में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया और साक्ष्यों का जाल बुनना शुरू किया। केवल चश्मदीदों के बयान ही नहीं, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक जांच (Scientific Investigation) का सहारा लेकर पुलिस ने अपराधी तक पहुंचने का रास्ता साफ किया।
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने आरोपी गोलू उर्फ बब्बू उर्फ कौशल अहिरवार (28 वर्ष), निवासी विदिशा को गिरफ्तार कर लिया। ठोस सबूतों के दम पर उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
न्यायालय का कड़ा फैसला
इस पूरे प्रकरण की सुनवाई विदिशा की विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्रीमती अपर्णा आर. शर्मा की अदालत में चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के गहन अवलोकन के बाद, 25 जून 2026 को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी गोलू उर्फ बब्बू को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त 6 महीने की सजा और भुगतनी होगी।
अपराधियों में संदेश
इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि विदिशा पुलिस महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। पुलिस की इस सफल विवेचना की शहर भर में प्रशंसा हो रही है। आम नागरिकों का कहना है कि ऐसे फैसलों से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है, बल्कि समाज में दरिंदगी करने वालों के मन में कानून का डर भी पैदा होता है।
विदिशा भारती का संकल्प: हम ऐसी खबरों को प्रमुखता से उठाते रहेंगे ताकि अपराध मुक्त समाज की कल्पना को साकार किया जा सके।
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