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बंडा सिविल अस्पताल की लापरवाही: 19 महीने के मासूम ने गंवाई आंखों

28-06-2026  Vijay Sharma  25 views
बंडा सिविल अस्पताल की लापरवाही: 19 महीने के मासूम ने गंवाई आंखों

​बंडा (सागर): मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो न केवल चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोल रही है, बल्कि हर किसी के दिल को झकझोर कर रख देने वाली है। बंडा सिविल अस्पताल की कथित लापरवाही ने एक 19 महीने के मासूम को पूरी जिंदगी के लिए अंधेरे में धकेल दिया है। एक साधारण सी बीमारी का इलाज कराने पहुंचे पिता को क्या पता था कि अस्पताल से लौटते समय उनकी गोद खाली नहीं, तो कम से कम खुशियां जरूर खत्म हो जाएंगी।


​क्या है पूरा मामला?
​ग्राम भूसा कमलपुर के रहने वाले पीड़ित पिता इन्द्राज विश्वकर्मा ने बताया कि 29 मई 2026 को उनका 1 साल 7 महीने का बेटा विनय सर्दी और आंखों में हल्की लालिमा से परेशान था। बच्चे को लेकर पिता बड़े भरोसे के साथ बंडा सिविल अस्पताल पहुंचे। ओपीडी में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को बच्चे को दिखाया, जिसके बाद उन्हें कुछ दवाइयां, एक आई ड्रॉप और इंजेक्शन दिया गया।


​पीड़ित पिता के अनुसार, उन्होंने बच्चे को दवा दी और करीब 3 से 4 घंटे अस्पताल में ही रुके। लेकिन दवा का असर होने के बजाय बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते मासूम की आंखों की स्थिति चिंताजनक हो गई।


​सागर से भोपाल तक भटके, अंत में मिली ये दुखद खबर
​अस्पताल में स्थिति हाथ से निकलते देख डॉक्टरों ने बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल, सागर रेफर कर दिया। सागर के डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे किसी बड़े संस्थान में ले जाने की सलाह दी। बदहवास पिता किसी तरह अपने फूल से बच्चे को लेकर एम्स (AIIMS), भोपाल पहुंचे। वहां हुई जांच के बाद जो खुलासा हुआ, उसने पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी।
​एम्स के डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि गलत इलाज या लापरवाही के कारण मासूम विनय की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा चुकी है। अब वह बच्चा देख पाने में असमर्थ है।
​प्रशासन से न्याय की गुहार


​इस घटना से स्तब्ध पिता इन्द्राज विश्वकर्मा ने बंडा थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी है। पिता का आरोप है कि सिविल अस्पताल बंडा के संबंधित डॉक्टर ने इलाज में घोर लापरवाही बरती है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि वे संबंधित डॉक्टर को शक्ल से पहचानते हैं, हालांकि नाम से अवगत नहीं हैं। फिलहाल, पुलिस ने आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।


​चिकित्सा जगत में उठे गंभीर सवाल
​यह मामला सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा? एक मामूली सर्दी-जुकाम और आंखों की लालिमा का गलत उपचार कैसे किसी मासूम को नेत्रहीन बना सकता है? क्या यह डॉक्टरों की लापरवाही है या सिस्टम की अनदेखी? फिलहाल, बंडा क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहा है।


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