भोपाल। मध्यप्रदेश जल निगम की कार्यप्रणाली अब दूसरे राज्यों के लिए 'रोल मॉडल' बन गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को उड़ीसा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश का दौरा किया। इस दौरान उड़ीसा की टीम ने मध्यप्रदेश में ग्रामीण जल प्रदाय, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और जल प्रबंधन के सफल मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया।
मध्यप्रदेश के नवाचारों से प्रभावित हुआ उड़ीसा
मध्यप्रदेश जल निगम के दफ्तर में हुई इस विशेष बैठक में आधुनिक तकनीक और नवाचारों पर विस्तार से चर्चा हुई। जल निगम के प्रबंध संचालक के.वी.एस. चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि कैसे डिजिटल मॉनिटरिंग और रियल-टाइम निगरानी के जरिए गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुँचाया जा रहा है। उड़ीसा के मंत्री रबी नारायण नायक मध्यप्रदेश की 'जल रेखा' और 'पंचायत दर्पण' जैसी डिजिटल नवाचार प्रणालियों से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मध्यप्रदेश की कई बेहतरीन व्यवस्थाओं को अब उड़ीसा में भी लागू किया जाएगा ताकि वहां के ग्रामीण अंचलों में पानी की किल्लत को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।
क्यों खास है एमपी का 'जल मॉडल'?
मध्यप्रदेश जल निगम ने जिस तरह से परियोजनाओं का क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन-संधारण (O&M) का ढांचा तैयार किया है, उसने कम समय में बड़ी सफलता हासिल की है। बैठक में इस बात पर मंथन हुआ कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपयोग और विद्युत बिल भुगतान जैसी जटिल समस्याओं को तकनीक के जरिए सरल बनाया गया है। उड़ीसा की टीम ने न केवल कागजी मॉडल को समझा, बल्कि इसके व्यावहारिक पहलुओं और जमीनी चुनौतियों के समाधान पर भी लंबी चर्चा की।
डिजिटल गवर्नेंस का दिखेगा असर
उड़ीसा के मंत्री नायक ने मध्यप्रदेश जल निगम की पेशेवर और परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश ने जिस तरह से तकनीक को जल सेवा के साथ जोड़ा है, वह वाकई प्रेरणादायी है। यहां का अध्ययन भ्रमण हमें उड़ीसा में ग्रामीण जल प्रदाय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में एक नई दिशा देगा।”
दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच इस बैठक में भविष्य में आपसी सहयोग, संस्थागत ढांचे की मजबूती और डिजिटल गवर्नेंस को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। उड़ीसा के प्रतिनिधिमंडल में विभाग के आयुक्त-सह-सचिव गिरिश एस.एन., पेयजल एवं स्वच्छता निदेशक विनीत भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव मधुस्मिता सामल और इंजीनियर-इन-चीफ रत्नाकर सियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मध्यप्रदेश जल निगम का यह नवाचार केवल पानी पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन और तकनीक का ऐसा मेल है जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन रहा है। उम्मीद है कि उड़ीसा में भी इस मॉडल के लागू होने से लाखों लोगों की पेयजल संबंधी समस्याएं दूर होंगी और वहां भी 'हर घर जल' का सपना डिजिटल रफ्तार के साथ पूरा होगा।
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