Vidisha Bharti

Header
collapse
...
Home / बिजनेस / नर्मदापुरम के होम साइंस कॉलेज में 9 लाख का 'मैजिकल स्कैम

नर्मदापुरम के होम साइंस कॉलेज में 9 लाख का 'मैजिकल स्कैम

30-06-2026  Editor Shubham Jain  23 views
नर्मदापुरम के होम साइंस कॉलेज में 9 लाख का 'मैजिकल स्कैम

​विदिशा भारती डेस्क।
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित होम साइंस कॉलेज में सब कुछ 'ऑल इज़ वेल' होने का दावा करने वालीं प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन के दावों की हवा निकल गई है। रिटायरमेंट के करीब खड़ीं प्राचार्य साहिबा के कार्यकाल का एक ऐसा 'अनोखा घोटाला' सामने आया है, जिसने उच्च शिक्षा विभाग से लेकर कलेक्ट्रेट तक के गलियारों में खलबली मचा दी है। कॉलेज में खेल सामग्री के नाम पर एक अदद गेंद तक नहीं पहुंची, लेकिन कागजों का जादू देखिए—₹9 लाख से अधिक का भुगतान भी हो गया!


​कागजों पर 'खेला', हकीकत में सन्नाटा
​मामला बेहद शातिराना है। सरकारी मद से कॉलेज के लिए खेल सामग्री खरीदने हेतु ₹9 लाख 20 हजार की राशि आवंटित की गई थी। नियम के मुताबिक, यह सामान भोपाल की एक फर्म से आना था। कॉलेज के रिकॉर्ड बताते हैं कि सामान आया, स्टॉक रजिस्टर में उसकी एंट्री भी हो गई और वाउचर तैयार कर ट्रेजरी से भुगतान भी कर दिया गया।


​लेकिन, जब जमीनी हकीकत टटोली गई, तो स्टोर रूम खाली मिला। सवाल यह है कि यदि सामान आया ही नहीं, तो वह कागजों में कैसे पहुंचा? और भुगतान की फाइलें किसने और क्यों पास कीं?


​विधायक की सख्ती ने खोली पोल
​इस 'खेल' का पर्दाफाश तब हुआ जब क्षेत्र के विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा को इसकी भनक लगी। अपनी सक्रियता के लिए पहचाने जाने वाले विधायक ने बिना देरी किए कॉलेज का रुख किया। कॉलेज पहुंचते ही उन्होंने जब कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो प्राचार्य के पसीने छूट गए।


​विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने कहा, "यह सीधे-सीधे सरकारी धन की लूट है। सामान एक भी नहीं आया और उसे प्राप्त दिखा दिया गया। बकायदा वाउचर बनाकर रजिस्टर में एंट्री भी ठोक दी गई। हमने तत्काल प्रभाव से पेमेंट रुकवाया है और उच्च शिक्षा आयुक्त, कलेक्टर व कमिश्नर को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।"


​जांच की आंच और प्राचार्य की सफाई
​विधायक की शिकायत पर तहसीलदार सरिता मालवीया भारी लाव-लश्कर के साथ कॉलेज पहुंचीं। दिनभर प्राचार्य कक्ष में हड़कंप का आलम रहा। अधिकारियों ने जब स्टॉक रजिस्टर और मौके की जांच की, तो गड़बड़ी प्रथम दृष्टया स्पष्ट नजर आई। तहसीलदार ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है।


​अब प्रशासन केवल इसी खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि 'जनभागीदारी फंड' से हुई पिछली तमाम खरीदारी की कुंडली भी खंगाली जा रही है। लंबे समय से कॉलेज में अपनी एकछत्र हुकूमत चलाने वालीं डॉ. कामिनी जैन अब चारों तरफ से घिर चुकी हैं। हालांकि, प्राचार्य अभी भी अपने बचाव में जुटी हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, "नियम के अनुसार ही कार्य किया गया है, मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं।"


​क्या रिटायरमेंट से पहले 'विदाई' होगी भारी?
​बड़ा सवाल यह है कि अगर सामान स्टोर रूम में नहीं है, तो वह गया कहां? क्या यह रिटायरमेंट के ठीक पहले अपनी जेबें भरने का कोई 'अलविदा प्लान' था? फिलहाल जांच की आंच तेज हो गई है। अगर इस मामले में लीपापोती नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरे बेनकाब होना तय है। 'विदिशा भारती' इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि जनता का पैसा किसी की व्यक्तिगत जागीर नहीं है।


Share:

रिक्वायरमेंट

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy