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दिल्ली में कांग्रेस का बड़ा ‘पावर प्ले’: खरगे ने उतारी

04-05-2026  Editor Shubham Jain  231 views
दिल्ली में कांग्रेस का बड़ा ‘पावर प्ले’: खरगे ने उतारी

नयी दिल्ली: दिल्ली की सियासत में अपनी खोई हुई चमक वापस पाने के लिए कांग्रेस ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। रविवार की देर रात, जब पूरी दिल्ली सो रही थी, तब कांग्रेस आलाकमान ने राजधानी के संगठन को पूरी तरह से रीबूट (Reboot) कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) में बड़े फेरबदल को हरी झंडी दिखाते हुए एक शक्तिशाली 'राजनीतिक मामलों की समिति' (PAC) का गठन किया है, साथ ही पदाधिकारियों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट जारी की है।

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पार्टी ने इस फेरबदल में 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'अनुभव' का जबरदस्त तड़का लगाया है। संगठन को नई धार देने के लिए 12 उपाध्यक्ष और 26 महासचिवों की नियुक्ति की गई है। यह केवल नियुक्तियां नहीं हैं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का वह 'वॉर रूम' है जो सीधे जमीन पर भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) को चुनौती देगा।

बड़ी बात: इस नई टीम के जरिए कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह दिल्ली में 'तीसरे विकल्प' के तौर पर नहीं, बल्कि मुख्य दावेदार के रूप में वापसी करना चाहती है।

💎 PAC में दिग्गजों की एंट्री: गुटबाजी पर ‘फुल स्टॉप’

कांग्रेस ने दिल्ली के लिए 31 सदस्यीय बेहद पावरफुल 'पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी' (PAC) बनाई है। इसमें पार्टी के उन चेहरों को एक साथ लाया गया है जो कभी अलग-अलग धड़ों में बंटे नजर आते थे।

समिति के प्रमुख चेहरे:

देवेन्द्र यादव: वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष (नेतृत्वकर्ता)

अजय माकन: पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और दिल्ली का बड़ा चेहरा

पुराने दिग्गज: जे.पी. अग्रवाल, सुभाष चोपड़ा, और अनिल चौधरी (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)

महिला और युवा नेतृत्व: अलका लांबा (महिला कांग्रेस अध्यक्ष) और उदित राज

इस कमेटी का मुख्य काम दिल्ली के ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी की लाइन तय करना और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का रोडमैप तैयार करना होगा।

📊 क्या है कांग्रेस की नई रणनीति?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में बीजेपी और 'आप' के बीच जारी सियासी खींचतान का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने अपनी घेराबंदी तेज कर दी है।

जमीनी पकड़: 26 महासचिवों को दिल्ली के अलग-अलग जिलों और ब्लॉकों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि संगठन की मृतप्राय हो चुकी इकाइयों में जान फूंकी जा सके।

एकजुटता का संदेश: पूर्व अध्यक्षों को सम्मान देकर खरगे ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि अब पुरानी आपसी रंजिशें छोड़कर साथ चलने का वक्त है।

मुद्दों की राजनीति: प्रदूषण, पानी की किल्लत और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर अब कांग्रेस आक्रामक रूप से सड़कों पर उतरने की तैयारी में है।

  निष्कर्ष: क्या लौटेगी कांग्रेस की पुरानी रंगत?

के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी यह सूची इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस अब 'Wait and Watch' मोड से बाहर निकल चुकी है। संगठन में इतनी बड़ी सर्जरी के बाद अब सबकी नजरें देवेन्द्र यादव की नई टीम की पहली बैठक पर टिकी हैं। क्या ये 'महा-नियुक्तियां' दिल्ली की जनता का भरोसा जीतने में कामयाब होंगी? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन कांग्रेस ने अपनी चाल चलकर विरोधियों के खेमे में हलचल जरूर पैदा कर दी है।


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