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अंतरिक्ष में भारत का 'तीसरा नेत्र': बादलों को चीरकर देखेगा

04-05-2026  Amit raikwar  5 views
अंतरिक्ष में भारत का 'तीसरा नेत्र': बादलों को चीरकर देखेगा

नई दिल्ली | भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में 3 मई 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। जब दुनिया गहरी नींद में थी, तब भारत के एक निजी स्टार्टअप 'गैलेक्सीआई' (GalaxEye) ने अंतरिक्ष में वो कर दिखाया, जिसने एलन मस्क की 'स्पेसएक्स' जैसी दिग्गज कंपनियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारत के पहले निजी और दुनिया के पहले 'ऑप्टोसार' (OptoSAR) उपग्रह 'मिशन दृष्टि' के सफल प्रक्षेपण ने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में तिरंगा गाड़ दिया है।

पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति ने कहा- ‘यही है विकसित भारत की तस्वीर’

इस ऐतिहासिक कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टीम गैलेक्सीआई और इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे 'युवा शक्ति का चमत्कार' बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह मिशन न केवल तकनीक में आत्मनिर्भरता का प्रमाण है, बल्कि रक्षा और कृषि के क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगा। वहीं, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे 'न्यू इंडिया' की छलांग करार दिया।

क्या है 'मिशन दृष्टि' और क्यों कांपेंगे दुश्मन?

190 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट कोई साधारण कैमरा नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में भारत का 'सुपर सेंसर' है। यह भारत में निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित अब तक का सबसे भारी और शक्तिशाली उपग्रह है। इसकी दो सबसे बड़ी खूबियां इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं:

बादलों के पार भी नजर: अक्सर खराब मौसम या घने बादलों के कारण सैटेलाइट तस्वीरें साफ नहीं आतीं, लेकिन 'मिशन दृष्टि' का सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) बादलों को चीरकर जमीन की स्पष्ट तस्वीर ले सकता है।

रात का अंधेरा भी बेअसर: इसमें लगे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और रडार का अनूठा मेल (OptoSAR) इसे रात के घने अंधेरे और भारी बारिश में भी 'चील जैसी नजर' प्रदान करता है।

डिफेंस से लेकर खेती तक: बदल जाएगी देश की सूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि 'मिशन दृष्टि' से मिलने वाला डेटा भारत की रणनीतिक सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। सीमा पर घुसपैठ हो या आपदा के समय राहत कार्य, यह उपग्रह सटीक जानकारी देगा। साथ ही, शहरी नियोजन (Urban Planning) और बुनियादी ढांचे की निगरानी में इससे क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।

इसरो और स्टार्टअप की जुगलबंदी ने रचा इतिहास

यह मिशन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का बेहतरीन उदाहरण है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी हाथों के लिए खोलने का फैसला सही साबित हुआ है। इसरो (ISRO) ने अपनी वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग सुविधाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से गैलेक्सीआई के इस सपने को हकीकत में बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

अब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी निजी कंपनियों के जरिए इतनी उन्नत जासूसी और निगरानी तकनीक मौजूद है। 'मिशन दृष्टि' का सफल होना इस बात का संकेत है कि आने वाला समय 'मेड इन इंडिया' स्पेस टेक का है।


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