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MP Rajya Sabha Election: एमपी में राज्यसभा की रणभेरी

03-05-2026  Editor Shubham Jain  6 views
MP Rajya Sabha Election: एमपी में राज्यसभा की रणभेरी

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचलें तेज हो गई हैं। जून के तपते महीने में प्रदेश का सियासी पारा भी सातवें आसमान पर रहने वाला है। मौका है राज्यसभा चुनाव का, और मैदान सजा है तीन खाली हो रही सीटों के लिए। लेकिन इस बार का मुकाबला 'मैच फिक्सिंग' जैसा सीधा नहीं लग रहा। सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक ऐसी आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है, जो विपक्ष के खेमे में खलबली मचा सकती है।


​तीसरी सीट का सस्पेंस: बीजेपी की 'आक्रामक' घेराबंदी
​संख्याबल के हिसाब से देखा जाए तो तीन सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है। खबर है कि भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। बीजेपी का यह कदम सिर्फ एक चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि कांग्रेस के मनोवैज्ञानिक और संख्यात्मक किले को ढहाना है।


​'आदिवासी कार्ड' से विपक्षी खेमे में हलचल
​सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा तीसरी सीट के लिए किसी कद्दावर आदिवासी चेहरे पर दांव लगा सकती है। इसके पीछे की गणित बड़ी गहरी है। आदिवासी वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस के आदिवासी विधायकों के मन को टटोलना है।


​सूत्रों का बड़ा दावा: कांग्रेस के कुछ आदिवासी विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। यदि भाजपा किसी आदिवासी चेहरे को मैदान में उतारती है, तो 'अंतरात्मा की आवाज' के नाम पर कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हो सकती है।
​क्या कहते हैं जीत के समीकरण?
​मध्यप्रदेश विधानसभा की वर्तमान स्थिति को देखें तो राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।

कागज पर कांग्रेस के पास 62 वोट हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन भाजपा की नजर उन्हीं 4-5 अतिरिक्त वोटों और कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे पर है। अगर भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो मुकाबला "क्रॉस वोटिंग" की दहलीज पर जा खड़ा होगा।

जून में होगा 'पावर गेम' का फैसला

इन तीन सीटों पर जून में चुनाव होने की संभावना है। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है—विपक्ष को चैन से नहीं बैठने देना। अगर बीजेपी तीसरी सीट जीतने में कामयाब रहती है, तो यह 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए एक और बड़ा झटका होगा।

मुख्य बिंदु जो बढ़ा रहे हैं टेंशन:

क्या कांग्रेस अपने सभी 62 विधायकों को एकजुट रख पाएगी?

क्या भाजपा का 'मिशन 3' सफल होगा?

आदिवासी प्रत्याशी उतारकर क्या भाजपा 'मास्टरस्ट्रोक' खेलेगी?

भोपाल से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। जल्द ही प्रत्याशियों के नामों का ऐलान हो सकता है। फिलहाल, मध्यप्रदेश की राजनीति में "वेट एंड वॉच" की स्थिति बनी हुई है।


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