राजगढ़। स्वास्थ्य विभाग में मृत कर्मचारी के नाम पर कई महीनों तक वेतन भुगतान किए जाने के मामले में शासन ने राजगढ़ की प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। मामला नरसिंहगढ़ क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डाबला में पदस्थ रही सफाईकर्मी सुमित्रा बाई से जुड़ा है। उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, सुमित्रा बाई की 18 जनवरी 2025 को मृत्यु हो गई थी, इसके बावजूद उनके नाम पर अक्टूबर 2025 तक प्रतिमाह 14,844 रुपए के वेतन भुगतान की अनियमितता सामने आई।
शासन की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को जारी निलंबन आदेश में डॉ. शोभा पटेल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल निर्धारित किया गया है।
मौत की सूचना के बाद भी जारी रहा भुगतान
मामले से संबंधित जांच रिपोर्ट के मुताबिक सुमित्रा बाई की मृत्यु 18 जनवरी 2025 को हुई थी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डाबला के मेडिकल ऑफिसर की ओर से 28 जनवरी 2025 को उनकी मृत्यु की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बावजूद कर्मचारी के नाम से वेतन भुगतान जारी रहा। जांच में यह भी बताया गया कि मृत कर्मचारी के नाम पर प्रतिमाह 14,844 रुपए की राशि का भुगतान किया गया। अक्टूबर 2025 तक भुगतान जारी रहने से कुल राशि करीब पौने दो लाख रुपए तक पहुंचने की बात सामने आई है।
जांच में सामने आई वित्तीय अनियमितता
शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर जांच कराई गई। जांच में मृत कर्मचारी के नाम पर वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीर माना गया। मामले में केवल एक अधिकारी की भूमिका ही नहीं, बल्कि कार्यालयीन प्रक्रिया से जुड़े अन्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आई है।
उपलब्ध रिपोर्टों में डॉ. शोभा पटेल के साथ कार्यालय के लेखापाल दिनेश पारीक की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। वहीं, उपयोग किए गए जांच विवरण में अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आती है।
सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई
शासकीय कार्रवाई में डॉ. शोभा पटेल पर पद का उचित निर्वहन नहीं करने और वित्तीय अनियमितता से संबंधित गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।
निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल रखा गया है। आगे की विभागीय जांच और कार्रवाई के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का परीक्षण किया जाएगा।
पहले भी लोकायुक्त कार्रवाई में फंसी थीं CMHO
डॉ. शोभा पटेल के खिलाफ इससे पहले अप्रैल 2026 में लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई भी हो चुकी है। 17 अप्रैल 2026 को भोपाल लोकायुक्त की टीम ने उन्हें ₹20 हजार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। लोकायुक्त के अनुसार, एक डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े अप्रूवल के मामले में रिश्वत मांगने की शिकायत की गई थी। कार्रवाई राजगढ़ जिला चिकित्सालय परिसर स्थित उनके सरकारी आवास पर की गई थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के बाद डॉ. पटेल के खिलाफ यह दूसरा बड़ा प्रशासनिक मामला सामने आया है। अप्रैल की लोकायुक्त कार्रवाई और अब मृत कर्मचारी के नाम पर वेतन भुगतान से जुड़े मामले ने राजगढ़ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक या विभागीय जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया से होगा।
मृत कर्मचारी के परिवार और सरकारी व्यवस्था पर सवाल
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कर्मचारी की मृत्यु की सूचना विभाग को दिए जाने के बावजूद उनके नाम पर वेतन भुगतान जारी रहने की जांच में बात सामने आई है। सरकारी रिकॉर्ड में कर्मचारी की वास्तविक स्थिति समय पर अपडेट नहीं होने या भुगतान प्रक्रिया में अनियमितता होने से सरकारी राशि के दुरुपयोग की स्थिति बनी।
अब विभागीय कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट होना बाकी है कि भुगतान प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई, कितनी राशि का वास्तविक भुगतान हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
मामले ने स्वास्थ्य विभाग की वित्तीय निगरानी और कर्मचारी रिकॉर्ड अपडेट करने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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