विदिशा भारती डेस्क | शैलेंद्र चौधरी
पठारी। किसी भी परिवार का असली वजूद उसकी जड़ों में बसता है, और वे जड़ें हमारे बुजुर्ग हैं। अनुभव की धूप-छांव देखकर समाज को सही रास्ता दिखाने वाले वयोवृद्धों के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस का आयोजन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि कृतज्ञता जताने का पर्व बन गया। ग्राम पंचायत पठारी में इसी भाव के साथ अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस का भव्य और आत्मीय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों को आमंत्रित कर उनका अभिनंदन किया गया, जिससे उपस्थित बुजुर्गों के चेहरों पर गर्व और संतोष की मुस्कान बिखर गई।
वयोवृद्धों के सम्मान में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
ग्राम पंचायत भवन परिसर में आयोजित इस गरिमामय समारोह का मुख्य उद्देश्य समाज में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका, उनके अधिकारों और उनके प्रति नई पीढ़ी के कर्तव्यों को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में कुरवाई जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आयुष अग्रवाल विशेष रूप से शामिल हुए।
सीईओ आयुष अग्रवाल ने उपस्थित बुजुर्गों को शॉल एवं पुष्पहार भेंट कर नमन किया। उन्होंने सभी वरिष्ठजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुजुर्गों के चेहरे की झुर्रियों में जीवन की किताबों का गहरा ज्ञान छिपा होता है। जब तक परिवार और समाज अपने पुरखों का सम्मान करना नहीं सीखता, तब तक कोई भी विकास अधूरा माना जाएगा। युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह अपने व्यस्त समय में से कुछ पल निकालकर बुजुर्गों के साथ बैठे, उनके अनुभवों को सुने और उनकी देखभाल को अपनी पहली प्राथमिकता बनाए।
प्रशासनिक संवेदनशीलता और अपनापन
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक औपचारिकताएं किनारे दिखीं और आत्मीयता का माहौल हावी रहा। जनपद सीईओ आयुष अग्रवाल ने एक-एक कर बुजुर्गों से संवाद किया। उन्होंने उनके स्वास्थ्य का हाल-चाल जाना, उनकी पेंशन और अन्य शासकीय योजनाओं से जुड़े अनुभवों पर सीधी बातचीत की। अधिकारियों को अपने बीच बैठा पाकर और इस तरह अपनापन देखकर वयोवृद्ध भावुक हो उठे।
समारोह में उपस्थित रोजगार सहायक मुकेश जैन ने ग्राम पंचायत स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि पंचायत का निरंतर प्रयास रहता है कि किसी भी बुजुर्ग को सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान कार्ड या अन्य जनहितैषी योजनाओं के लाभ के लिए अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें। पठारी पंचायत सदैव अपने बुजुर्गों की सेवा में तत्पर है।
स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस अवसर पर सत्यनारायण रिछारिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वृद्ध दिवस केवल साल में एक दिन मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हर दिन अपने माता-पिता और पुरखों के प्रति कृतज्ञ रहने की सीख देता है।
वहीं, रति रामपाल और हबीब खान ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन का इस प्रकार सीधे ग्रामीणों और बुजुर्गों के बीच आकर उनका सम्मान करना एक सराहनीय पहल है। इससे समाज में वृद्धों के प्रति सम्मान और जागरूकता का वातावरण तैयार होता है। स्थानीय युवाओं को भी इस कार्यक्रम से यह प्रेरणा मिली कि परिवार की असली पूंजी भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि घर में मौजूद बुजुर्गों का आशीर्वाद है।
शासन की योजनाओं और अधिकारों पर जोर
कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई:
* वृद्धावस्था एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन: पात्र वरिष्ठजनों को समय पर पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करना।
* स्वास्थ्य सुरक्षा (आयुष्मान योजना): 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवर की जानकारी।
* वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम: बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके कानूनी संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता।
सीईओ आयुष अग्रवाल ने पंचायत अमले को सख्त निर्देश दिए कि क्षेत्र के किसी भी असहाय या निराश्रित बुजुर्ग की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर तुरंत समाधान किया जाए।
मुस्कुराहटों और आशीर्वाद के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी वरिष्ठ नागरिकों को फल और स्वल्पाहार वितरित किया गया। बुजुर्गों ने अधिकारियों और पंचायत अमले की पीठ थपथपाकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। इस सादे लेकिन प्रेरणादायक आयोजन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि पठारी पंचायत परंपरा, संस्कृति और बुजुर्गों के मान-सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती रहेगी।
कार्यक्रम में मुकेश जैन, सत्यनारायण रिछारिया, रति रामपाल, हबीब खान के साथ-साथ क्षेत्र के दर्जनों वृद्धजन, युवा और पंचायत कर्मी उपस्थित रहे।
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