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मेडिकल कॉलेज में देहदान अभियान के पोस्टर पर मचा बवाल

29-08-2026  Vidisha Raghvendra dangi  20 views
मेडिकल कॉलेज में देहदान अभियान के पोस्टर पर मचा बवाल

विदिशा। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, विदिशा में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कॉलेज परिसर में लगाए गए देहदान अभियान से जुड़े एक पोस्टर में एक जिंदा युवक की तस्वीर को देहदान करने वाले मृत व्यक्तियों के साथ प्रदर्शित कर दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि यह पोस्टर कथित तौर पर करीब 15 दिनों तक कॉलेज परिसर में लगा रहा, लेकिन इस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस गंभीर गलती पर नहीं पड़ी। मामला तब चर्चा में आया, जब शनिवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मेडिकल कॉलेज पहुंचने के दौरान लोगों की नजर विवादित पोस्टर पर पड़ी।

जानकारी सामने आने के बाद युवक के परिजनों ने पोस्टर में तस्वीर लगाए जाने पर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद कॉलेज परिसर से पोस्टर को हटा दिया गया।

देहदान के पोस्टर में जिंदा युवक की तस्वीर से सवाल

देहदान को समाजसेवा और मानवता से जुड़ा बेहद संवेदनशील अभियान माना जाता है। लोग मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के लिए समर्पित करने का संकल्प लेते हैं। ऐसे अभियान से जुड़े प्रचार सामग्री में किसी व्यक्ति की पहचान और तस्वीर प्रकाशित करने से पहले उसकी जानकारी का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ऐसे में यदि किसी जिंदा व्यक्ति की तस्वीर को मृत व्यक्ति के रूप में पोस्टर पर प्रदर्शित किया गया, तो यह केवल सामान्य प्रिंटिंग की गलती नहीं बल्कि सूचना के सत्यापन और निगरानी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पोस्टर तैयार करने वाले स्तर से लेकर उसे कॉलेज परिसर में लगाने तक आखिर किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने तस्वीर और नाम का सत्यापन क्यों नहीं किया?

करीब 15 दिन तक पोस्टर लगा रहा, किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया?

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पोस्टर का लंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर लगा रहना बताया जा रहा है। यदि परिजनों के विरोध के बाद पोस्टर हटाया गया, तो सवाल यह भी उठता है कि करीब 15 दिनों तक कॉलेज में आने-जाने वाले मरीजों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अधिकारियों में से किसी की नजर इस गलती पर क्यों नहीं गई?

मामला सामने आने के बाद पोस्टर को हटाना तत्काल जरूरी कदम था, लेकिन इससे उन सवालों का जवाब नहीं मिलता कि गलती हुई कैसे और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?

परिजनों के विरोध के बाद हटाया गया पोस्टर

बताया गया है कि युवक के परिजनों को जब इस बात की जानकारी मिली कि उनके परिवार के जीवित सदस्य की तस्वीर देहदान करने वाले लोगों के बीच लगाई गई है, तो उन्होंने इसका विरोध किया।

परिजनों के विरोध के बाद विवादित पोस्टर को कॉलेज परिसर से हटा दिया गया। हालांकि अब यह मामला केवल पोस्टर हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। लोगों की नजर इस बात पर है कि कॉलेज प्रबंधन इस घटना की जांच कराता है या नहीं और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

देहदान जैसे अभियान की साख पर भी असर

देहदान अभियान का उद्देश्य लोगों को मृत्यु के बाद शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए समर्पित करने के लिए प्रेरित करना है। ऐसे अभियान के प्रचार में यदि गलत जानकारी सामने आती है तो इसका सीधा असर अभियान की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।

किसी व्यक्ति को उसकी जानकारी या वास्तविक स्थिति की पुष्टि किए बिना मृत व्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करना बेहद संवेदनशील विषय है। खासकर मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान से ऐसी गलती सामने आने पर लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजिमी है।

पहले भी सवालों के घेरे में रहा मेडिकल कॉलेज

अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, विदिशा पहले भी अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। मरीजों और उनके परिजनों से विवाद, इलाज में लापरवाही के आरोप और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

अब देहदान अभियान के पोस्टर से जुड़ा यह मामला कॉलेज की प्रशासनिक निगरानी और संवेदनशीलता को लेकर एक और सवाल खड़ा करता है।

हालांकि किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले कॉलेज प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष और घटना की पूरी जांच सामने आना जरूरी है। प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि पोस्टर किसने तैयार कराया, तस्वीर और नाम का सत्यापन किस स्तर पर होना था और इतनी बड़ी चूक करीब 15 दिनों तक कैसे बनी रही।

अब जवाबदेही की मांग

घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि एक जिंदा व्यक्ति की तस्वीर मृतकों के बीच पहुंची कैसे? यदि यह मानवीय या तकनीकी गलती थी तो पोस्टर तैयार करने और लगाने से पहले इसकी जांच क्यों नहीं हुई? और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

देहदान जैसे सामाजिक और संवेदनशील अभियान को लोगों का विश्वास चाहिए। ऐसे में इस तरह की घटना की निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही न केवल संबंधित युवक और उसके परिवार के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

विदिशा भारती की नजर अब इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच के अगले कदम पर रहेगी।


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