भोपाल। राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित डी-मार्ट में शक्कर के स्टॉक को लेकर सामने आए बड़े अंतर ने अधिकारियों का ध्यान खींचा है। रिकॉर्ड में जहां करीब 5 हजार मीट्रिक टन शक्कर का स्टॉक दर्ज पाया गया, वहीं मौके पर जांच के दौरान करीब 50 मीट्रिक टन शक्कर ही उपलब्ध मिली। रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद मामले की जांच के लिए दिल्ली से शक्कर संचालनालय की टीम भोपाल पहुंची।
त्योहारों के सीजन में शक्कर की उपलब्धता, स्टॉक और संभावित जमाखोरी पर केंद्र सरकार की निगरानी के बीच सामने आया यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच टीम ने डी-मार्ट प्रबंधन से स्टॉक संबंधी रिकॉर्ड और पूरे मामले को लेकर जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रबंधन के बयान भी दर्ज किए।
रिकॉर्ड में 5000 मीट्रिक टन शक्कर, मौके पर करीब 50 टन
अयोध्या बायपास स्थित डी-मार्ट के शक्कर स्टॉक से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में करीब 5000 मीट्रिक टन शक्कर दर्ज होने की बात सामने आई। इसके विपरीत जब मौके पर उपलब्ध स्टॉक की जांच की गई तो करीब 50 मीट्रिक टन शक्कर ही मिली।
यानी कागजी रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद शक्कर की मात्रा में भारी अंतर दिखाई दिया। शुरुआती तौर पर यह मामला इसलिए भी गंभीर नजर आया क्योंकि शक्कर जैसी आवश्यक वस्तु के स्टॉक पर त्योहारों के दौरान विशेष निगरानी रखी जा रही है।
स्टॉक में अंतर सामने आने के बाद संबंधित रिकॉर्ड, एंट्री और प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी की जांच की गई। इसी सिलसिले में दिल्ली से शक्कर संचालनालय की टीम भोपाल पहुंची और मामले की पड़ताल शुरू की।
डी-मार्ट प्रबंधन ने बताई रिकॉर्ड एंट्री की गलती
जांच के दौरान डी-मार्ट प्रबंधन की ओर से स्टॉक में अंतर को लेकर अलग स्पष्टीकरण दिया गया। प्रबंधन का कहना था कि क्विंटल की जगह मीट्रिक टन में एंट्री हो गई थी।
प्रबंधन के अनुसार वास्तविक स्टॉक करीब 50 मीट्रिक टन के आसपास था, लेकिन रिकॉर्ड में मात्रा दर्ज करते समय इकाई से जुड़ी गलती के कारण आंकड़ा बहुत अधिक दिखाई देने लगा। इसी वजह से रिकॉर्ड में करीब 5000 मीट्रिक टन शक्कर का स्टॉक दर्ज नजर आया।
प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि रिकॉर्ड में हुई इस गलती की जानकारी ई-मेल के माध्यम से संबंधित स्तर पर भेजी गई थी। हालांकि जांच के दौरान इस दावे से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया।
गलत ई-मेल आईडी के कारण नहीं पहुंची सूचना
जांच टीम के सामने यह बात सामने आई कि जिस ई-मेल आईडी पर स्टॉक में हुई गलती की जानकारी भेजे जाने की बात कही गई थी, वह गलत ई-मेल आईडी थी। इसके चलते प्रबंधन की ओर से भेजी गई सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंच ही नहीं सकी।
इस स्थिति ने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया। एक ओर रिकॉर्ड में हजारों मीट्रिक टन शक्कर का स्टॉक दिखाई दे रहा था, दूसरी ओर वास्तविक स्टॉक काफी कम था और कथित सुधार की सूचना भी सही ई-मेल पते पर नहीं पहुंच पाई।
जांच टीम ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डी-मार्ट प्रबंधन का पक्ष सुना और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए।
अधिकारियों ने सही ई-मेल पर जानकारी भेजने के दिए निर्देश
मामले की जांच के दौरान टीम ने डी-मार्ट प्रबंधन को आवश्यक निर्देश भी दिए। प्रबंधन से कहा गया कि स्टॉक से संबंधित सही जानकारी सही ई-मेल आईडी पर भेजी जाए, ताकि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।
जांच टीम ने स्टॉक से संबंधित जानकारी और प्रबंधन के स्पष्टीकरण को दर्ज किया है। रिकॉर्ड में दिखाई दे रहे बड़े अंतर के पीछे एंट्री की गलती और सूचना के सही स्थान तक नहीं पहुंचने की बात सामने आने के बाद अब पूरे मामले की प्रक्रिया और दस्तावेजों को देखा जा रहा है।
त्योहारों के बीच शक्कर स्टॉक पर केंद्र की नजर
त्योहारों के दौरान बाजार में शक्कर की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में शक्कर की उपलब्धता और स्टॉक की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। केंद्र सरकार की ओर से भी शक्कर के स्टॉक पर निगरानी जारी है, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी जैसी स्थिति को रोका जा सके।
इसी निगरानी व्यवस्था के बीच भोपाल के डी-मार्ट में रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध शक्कर की मात्रा में सामने आया अंतर जांच का विषय बना है। हालांकि डी-मार्ट प्रबंधन ने इसे इकाई दर्ज करने में हुई गलती बताया है, लेकिन रिकॉर्ड में इतनी बड़ी मात्रा दिखाई देने के कारण अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की।
5000 बनाम 50 टन ने खड़े किए सवाल
पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा 5000 मीट्रिक टन और करीब 50 मीट्रिक टन का अंतर है। कागजों में हजारों मीट्रिक टन का स्टॉक और मौके पर उससे बहुत कम मात्रा मिलने के बाद स्वाभाविक रूप से स्टॉक रिकॉर्ड की सटीकता को लेकर सवाल उठे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार डी-मार्ट प्रबंधन ने इसे क्विंटल और मीट्रिक टन की एंट्री से जुड़ी गलती बताया है। साथ ही प्रबंधन का कहना है कि गलती की जानकारी ई-मेल से भेजी गई थी, लेकिन गलत ई-मेल आईडी के कारण वह सूचना संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच सकी।
दिल्ली से पहुंची शक्कर संचालनालय की टीम ने प्रबंधन के बयान दर्ज किए हैं और सही ई-मेल पर जानकारी भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब इस मामले में रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति और स्टॉक एंट्री की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
विदिशा भारती की नजर: भोपाल के डी-मार्ट में शक्कर स्टॉक से जुड़ा यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि त्योहारों के समय आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और स्टॉक की निगरानी पर विशेष जोर रहता है। रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और वास्तविक स्टॉक के बीच सामने आया अंतर फिलहाल जांच के दायरे में है।
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