विदिशा। जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र से बाल संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर मिली शिकायत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 16 वर्षीय बालिका को उसके घर से सुरक्षित रेस्क्यू किया। शिकायत में बालिका को कथित तौर पर करीब छह महीने से घर के एक कमरे में बंद रखने की जानकारी दी गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग विनीता कांसवा ने तत्काल संज्ञान लिया और बालिका के रेस्क्यू तथा संरक्षण के लिए संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित की।
शिकायत मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्राप्त शिकायत में हैदरगढ़ क्षेत्र की एक नाबालिग बालिका को लंबे समय से कमरे में बंद रखे जाने की सूचना मिली थी। शिकायत सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया।
बालिका की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने बालिका के घर पहुंचकर स्थिति की जांच की।
मौके पर बालिका एक कमरे में डरी-सहमी अवस्था में मिली। टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल संरक्षण में लिया।
महिला एवं बाल विकास, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई
रेस्क्यू अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग से संरक्षण अधिकारी सरिता शुक्ला और पर्यवेक्षक सोनू प्रजापति शामिल रहीं। पुलिस विभाग की ओर से थाना प्रभारी रघुराज सिंह रघुवंशी तथा राजस्व विभाग से तहसीलदार रघुनन्दन शुक्ला कार्रवाई में शामिल रहे।
संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बालिका की स्थिति देखी और उसे सुरक्षित बाहर निकाला। कार्रवाई के दौरान बालिका की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखा गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद बालिका को आगे की संरक्षण प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
बाल कल्याण समिति के सामने दर्ज हुए कथन
रेस्क्यू के बाद बालिका को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति के अध्यक्ष रामबाबू प्रजापति तथा सदस्य चंद्रभान सिंह बघेल, दीवान सिंह, सुनीता दांगी और लक्ष्मी शर्मा ने बालिका के कथन लिए।
बालिका ने अपने कथनों में आरोप लगाया कि परिवार की ओर से विवाह के लिए दबाव बनाया गया था। विवाह से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट और हिंसा की गई तथा उसे कमरे में बंद कर दिया गया।
बालिका ने अपने एक पैर को गंभीर रूप से चोट पहुंचाए जाने के संबंध में भी कथन दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने बालिका का मेडिकल परीक्षण कराने के निर्देश दिए।
इन आरोपों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और आगे की वैधानिक जांच के आधार पर होगी।
मेडिकल जांच के बाद वन स्टॉप सेंटर में संरक्षण
बाल कल्याण समिति ने बालिका की सुरक्षा, देखभाल और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उसे अस्थाई रूप से वन स्टॉप सेंटर में रखने के निर्देश दिए हैं।
बालिका को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उसके स्वास्थ्य और आवश्यक सहायता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मामले में बालिका के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आगे की प्रक्रिया नियमानुसार जारी है।
बाल संरक्षण व्यवस्था की अहम भूमिका
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बच्चों से जुड़ी संकट की स्थितियों में सहायता और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माध्यम है। इस मामले में हेल्पलाइन पर मिली शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया। संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद बालिका को उस स्थिति से बाहर निकाला गया, जिसमें वह लंबे समय से कथित तौर पर रह रही थी।
मामले में आगे होगी वैधानिक कार्रवाई
बालिका के कथनों और मेडिकल परीक्षण के आधार पर संबंधित विभागों द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले में बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि बालिका की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मामले से जुड़े तथ्यों की जांच के आधार पर आगे आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बालिका की पहचान गोपनीय रखना जरूरी
नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी पहचान की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए बालिका का नाम, पता और ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिससे उसकी पहचान उजागर हो।
मामले में सामने आए आरोपों को भी जांच और बालिका के कथनों के आधार पर देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति संबंधित जांच और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
हेल्पलाइन पर शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर प्राप्त शिकायत रही। शिकायत के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए लगाया।
संयुक्त टीम के रेस्क्यू के बाद बालिका को बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया गया। मेडिकल परीक्षण और अस्थाई संरक्षण की व्यवस्था के साथ अब मामला आगे की वैधानिक प्रक्रिया में है।
हैदरगढ़ क्षेत्र में सामने आया यह मामला बाल संरक्षण व्यवस्था की सतर्कता और समय पर शिकायत मिलने के महत्व को सामने लाता है। बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर संरक्षण में लिया गया है और उसके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई जारी है।
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