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जल है तो कल है: विदिशा के धामनोद में गूंजा जल संरक्षण का संकल्प

16-06-2026  Vidisha Raghvendra dangi  28 views
जल है तो कल है: विदिशा के धामनोद में गूंजा जल संरक्षण का संकल्प

विदिशा, 16 जून 2026

"बिन पानी सब सून" – यह कहावत आज भी उतनी ही सत्य है जितनी सदियों पहले थी। इसी सत्य को चरितार्थ करते हुए मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद की पहल पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत विदिशा जिले के ग्राम धामनोद में एक अनूठी मिसाल पेश की गई। यहाँ के ग्रामीणों ने न केवल अपने पारंपरिक जल स्रोतों का पूजन किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाने का दृढ़ संकल्प भी लिया।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

कुआं और बावड़ी, जो कभी हमारे गांवों की जीवन रेखा हुआ करते थे, आज उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं। धामनोद में आयोजित इस कार्यक्रम में नवांकुर संस्था 'आत्मनिर्भर सेवा समिति गुंजरी', 'जन जागरण समिति सेक्टर हैदरगढ़' और 'ग्राम धामनोद प्रस्फुटन समिति' ने मिलकर इन ऐतिहासिक जल स्रोतों को नया जीवन देने का बीड़ा उठाया है।

कार्यक्रम का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। कुआं-बावड़ी के किनारों को रंगोली से सजाया गया और दीप प्रज्वलन के साथ विधि-विधान से पूजन संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि जल संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक सफल प्रयास था।

जल संरक्षण: सिर्फ एक अभियान नहीं, जीवन की जरूरत

कार्यक्रम में उपस्थित ब्लॉक समन्वयक स्वदेश आचार्य ने जल की बूंद-बूंद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, “जल स्रोत हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर हैं। यदि आज हमने इन्हें नहीं बचाया, तो भविष्य में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) ही एकमात्र समाधान है।”

इस मौके पर प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र अहिरवार, महेश कुमार बैरागी और संस्था अध्यक्ष दिनेश मालवीय ने ग्रामीणों के साथ मिलकर जल संरक्षण पर गहन चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने निजी कुओं और बावड़ियों की साफ-सफाई करें और इसके आसपास जल भराव न होने दें।

सामूहिक संकल्प से बदलेगी तस्वीर

इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवाओं ने भाग लिया और यह वचन दिया कि वे जल स्रोतों में कचरा नहीं फेंकेंगे और समय-समय पर इनके पुनर्जीवन के लिए सामूहिक श्रमदान करेंगे।

यह अभियान विदिशा के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणा है। जब तक समाज का हर व्यक्ति जल संरक्षण को अपना धर्म नहीं मानेगा, तब तक हम आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित कल नहीं दे पाएंगे। धामनोद की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रयास सच्चे हों, तो बदलाव निश्चित है।

आप भी बनें जल रक्षक:

क्या आपने अपने आसपास के किसी कुएं या बावड़ी की सुध ली है? आज ही जागरूक बनें, पानी बचाएं और इस जल गंगा संवर्धन अभियान का हिस्सा बनें।


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