इटारसी: पुरानी इटारसी की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी बुधवार को किसी फिल्मी सेट में तब्दील हो गई। मौका था कोर्ट के आदेश पर एक घर को खाली कराने का, लेकिन नजारा ऐसा कि देखने वालों के पसीने छूट गए। ससुर और बहू के बीच सालों से सुलग रही विवाद की चिंगारी बुधवार को 'हाई-वोल्टेज ड्रामे' के साथ सड़क पर आ गई। भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अमला और तमाशबीन बनी सैकड़ों की भीड़ के बीच घंटों तक हंगामा चलता रहा।
कमरे में कैद हुई बहू, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
मामला तब बिगड़ गया जब तहसीलदार सुनीता साहनी की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम मकान खाली कराने पहुंची। कार्रवाई की भनक लगते ही बहू सविता सोनी ने अपने मासूम बच्चों के साथ खुद को कमरे में कैद कर लिया। बाहर से मिन्नतें की गईं, कानूनी दुहाई दी गई, लेकिन अंदर से सिर्फ खामोशी या विरोध की आवाज आती रही। काफी देर तक चले इस 'डेडलॉक' को तोड़ने के लिए आखिरकार प्रशासन को कड़ा कदम उठाना पड़ा। महिला पुलिस की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा गया और भारी विरोध के बीच महिला व बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सड़क पर गृहस्थी, आंखों में गुस्सा
जैसे ही ताला टूटा, घर का सामान एक-एक कर सड़क पर आने लगा। कॉलोनी में अफरातफरी का माहौल था। एक तरफ रोते बच्चे और आक्रोशित बहू थी, तो दूसरी तरफ अपने फैसले पर अडिग ससुर। कुछ ही घंटों में आलीशान दिखने वाला घर खाली हो गया और बरसों की गृहस्थी का सामान खुले आसमान के नीचे बिखर गया।
क्यों आई यह नौबत? जानिए पूरा विवाद
यह पूरा मामला ससुर सत्यनारायण सोनी और बहू सविता सोनी के बीच संपत्ति विवाद (Property Dispute) का है।
ससुर का आरोप: बुजुर्ग ससुर का कहना है कि बहू का व्यवहार लंबे समय से प्रताड़नापूर्ण रहा है। उन्होंने साफ कहा कि समझौते की अब कोई गुंजाइश नहीं है।
प्रशासनिक आदेश: तहसीलदार कार्यालय के अनुसार, न्यायालय कलेक्टर नर्मदापुरम ने सत्यनारायण सोनी के पक्ष में फैसला सुनाया था। उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों के तहत हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित भूखंड क्रमांक 132 और 133 का कब्जा वास्तविक भू-स्वामी (ससुर) को सौंपा गया है।
पारदर्शिता के लिए हुई वीडियोग्राफी
विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई। मौके पर राजस्व निरीक्षक तोपसिंह राजपूत, विजय सिंह किरार सहित पटवारियों की पूरी फौज तैनात थी। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए इटारसी पुलिस का भारी अमला और महिला आरक्षक मोर्चा संभाले हुए थे।
इस घटना ने एक बार फिर पारिवारिक विवादों की कड़वाहट और बुजुर्गों के कानूनी अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। फिलहाल, ससुर को उनका हक मिल गया है, लेकिन सड़क पर बैठी बहू और बच्चों की तस्वीरों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
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