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गुजरात में दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम: जैश-ए-मोहम्मद के 8 'स्लीपर सेल

04-07-2026  Editor Shubham Jain  2 views
गुजरात में दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम: जैश-ए-मोहम्मद के 8 'स्लीपर सेल

गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने एक सटीक और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक खतरनाक नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। राज्य में किसी बड़ी साजिश को अमलीजामा पहनाने की फिराक में बैठे 8 संदिग्ध आतंकियों को धर दबोचा गया है। यह कार्रवाई न केवल गुजरात बल्कि मध्य प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

एक साथ कई जिलों में हुई स्ट्राइक

गुजरात एटीएस ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि ये संदिग्ध गुजरात के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी अपनी जड़ें जमा रहे थे। गिरफ्तार किए गए 8 संदिग्धों में से 3 पाटन, 3 बनासकांठा, 1 नवसारी (गुजरात) और 1 आरोपी मध्य प्रदेश के देवास जिले का रहने वाला है।

युवाओं को बनाया जा रहा था निशाना

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मॉड्यूल में 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हैं। इनमें से कई की उम्र महज 18-19 साल है। इन युवाओं का इस्तेमाल 'स्लीपर सेल' के रूप में किया जा रहा था। इनका मुख्य मिशन स्थानीय युवाओं को बरगलाकर उन्हें 'गजवा-ए-हिंद' की खतरनाक विचारधारा के प्रति कट्टरपंथी बनाना और जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करना था।

पाकिस्तान से हो रही थी सीधी ‘डिटास्टिंग’

जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी संदिग्ध पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर 'अब्दुल्लाह' और 'मोहम्मद उमर' के लगातार संपर्क में थे। पाकिस्तान से निर्देश मिल रहे थे और काम भारत की जमीन पर हो रहा था। अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए इन्हें पाकिस्तान से ₹3 लाख की फंडिंग भी मुहैया कराई गई थी।

जिहादी साहित्य का गुजराती में अनुवाद

आतंक की आग को फैलाने के लिए ये आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया का सहारा ले रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों को इनके पास से 254 जिहादी साहित्य के टुकड़े और जैश के सरगना मसूद अजहर के नाम लिखे गए 8 उर्दू पत्र बरामद हुए हैं। ये लोग जैश के जिहादी साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर रहे थे ताकि स्थानीय स्तर पर युवाओं को अधिक आसानी से कट्टरपंथी बनाया जा सके।

सुरक्षित ठिकाने और कार की खरीद

मिली हुई फंडिंग से इन संदिग्धों ने एक पुरानी कार खरीदी थी और किसी सुरक्षित ठिकाने (सेफ हाउस) की तलाश में थे। हालांकि, इन्होंने किसी बड़े हथियार का इस्तेमाल अभी शुरू नहीं किया था, लेकिन इनकी तैयारी किसी बड़े धमाके या साजिश को अंजाम देने की ओर इशारा कर रही थी। एटीएस की त्वरित कार्रवाई ने समय रहते इनके इन नापाक इरादों को भांप लिया और उन्हें धराशायी कर दिया।

सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर

भले ही इनके पास से अभी हथियार बरामद नहीं हुए हैं, लेकिन बरामद हुए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य यह बताने के लिए काफी हैं कि भारत में जैश-ए-मोहम्मद अपने पैरों को फिर से पसारने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, एटीएस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके बाकी सहयोगियों और नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

यह कार्रवाई देश की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का प्रमाण है, जिन्होंने समय रहते एक बड़े आतंकी जाल को समय से पहले ही नेस्तनाबूद कर दिया।


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