राजेश शर्मा भोपाल: राजधानी भोपाल के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों 'सार्थक' ऐप को लेकर एक ऐसा 'डिजिटल कारनामा' सामने आया है, जिसने महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ सरकारी डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर आने के बजाय घर बैठे या शहर के दूसरे छोर से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इस 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर' वाले फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही सीएमएचओ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा डंडा चलाया है।
क्या था पूरा मामला?
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों को 'सार्थक' ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति (अटेंडेंस) लगानी होती है। यह ऐप जीपीएस लोकेशन के जरिए काम करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कर्मचारी अपनी ड्यूटी स्थल पर मौजूद है या नहीं। लेकिन भोपाल में तैनात कुछ चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारी इस तकनीकी व्यवस्था को ही 'धोखा' देने में जुट गए थे।
सीएमएचओ कार्यालय द्वारा की गई नियमित समीक्षा के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सिस्टम में यह साफ दिख रहा था कि डॉक्टर अस्पताल में नहीं, बल्कि कहीं और से ही अपनी हाजिरी लगा रहे थे।
किन पर गिरी गाज?
इस जांच में तीन बड़े नाम सामने आए, जो नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे थे:
डॉ. शक्ति गोलाइत (वरिष्ठ चिकित्सक): जांच में पाया गया कि ये साहब महीने के लगभग आधे दिन कार्यस्थल से दूर रहकर अटेंडेंस लगा रहे थे। इतना ही नहीं, कई बार तो उन्होंने चेक-आउट तक नहीं किया। लापरवाही को देखते हुए सीएमएचओ ने उनकी 15 दिन की सैलरी काटने के आदेश दिए हैं।
डॉ. अभिप्शा शर्मा (बांडेड डॉक्टर): ये डॉक्टर साहिबा अस्पताल से करीब 8.5 किलोमीटर दूर बैठकर अपनी हाजिरी लगा रही थीं। इस फर्जीवाड़े पर एक महीने का वेतन काटा गया है।
हेमलता मालवीय (कर्मचारी): इनका मामला और भी दिलचस्प है, ये लगभग 10 किलोमीटर दूर से ऐप पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थीं। इनका भी एक महीने का वेतन काटकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
प्रदेश भर में 'सुगबुगाहट', क्या अन्य जिलों में भी होगा एक्शन?
इस कार्रवाई के बाद से स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में सन्नाटा पसरा है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल भोपाल में ही यह लापरवाही हो रही थी? प्रदेश के अन्य जिलों में भी 'सार्थक ऐप' का उपयोग किया जा रहा है, तो क्या वहां भी ऐसी अनियमितताओं की जांच होगी?
क्या अन्य जिलों में भी डॉक्टर और कर्मचारी घर बैठे सरकारी खजाने से वेतन बटोर रहे हैं? यह एक ऐसा गंभीर मुद्दा है जिस पर अब प्रदेश स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि अगर अन्य जिलों में भी इस तरह की 'सख्त जांच' हुई, तो कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
विभाग की दो टूक: नहीं बख्शे जाएंगे लापरवाह
सीएमएचओ भोपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने कहा है कि सार्थक ऐप की डेटा मॉनिटरिंग और सख्त की जाएगी। जो भी कर्मचारी या डॉक्टर ड्यूटी के प्रति जिम्मेदारी नहीं दिखाएंगे, उन पर न केवल जुर्माना लगेगा, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक सबक है जो तकनीक का गलत फायदा उठाकर जनता की सेवा के नाम पर खिलवाड़ कर रहे हैं। अब देखना होगा कि इस 'डिजिटल सर्जरी' के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में कितनी पारदर्शिता आती है।
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