राजेश शर्मा भोपाल: राजधानी भोपाल के शिक्षा हब माने जाने वाले एमपी नगर में आज प्रशासन ने कोचिंग माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा और सख्त ऑपरेशन चलाया। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे बड़े कोचिंग संस्थानों पर प्रशासन का चाबुक चला है। नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए मशहूर 'दुर्रानी कोचिंग' और 'अनअकैडमी' के सेंटर को पूरी तरह सील कर दिया है।
सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति!
प्रशासन की यह कार्रवाई कोई अचानक नहीं, बल्कि एक लंबे समय से चल रही शिकायतों और चेतावनी के बाद हुई है। पिछले दिनों फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान इन संस्थानों में गंभीर खामियां पाई गई थीं। आग बुझाने के उपकरणों का अभाव, आपातकालीन निकास (Emergency Exit) का न होना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इन संस्थानों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था।
उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि इन संस्थानों को बार-बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया। नोटिस की मियाद खत्म होते ही, आज प्रशासन का सब्र जवाब दे गया और दोनों संस्थानों पर सरकारी ताला जड़ दिया गया।
मौके पर बना पंचनामा, मची खलबली
कार्रवाई के दौरान मौके पर उपायुक्त भुवन गुप्ता के साथ जोनल अधिकारी शैलेष चौहान, फायर ब्रिगेड टीम के इफ्तिखार खान और पंकज खरे मौजूद रहे। टीम ने मौके पर ही बारीकी से जांच की और पंचनामा तैयार किया। जैसे ही प्रशासन की गाड़ियाँ और पुलिस फोर्स एमपी नगर पहुंची, कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते आसपास के अन्य कोचिंग सेंटरों में भी सन्नाटा पसर गया।
क्या होगा हजारों छात्रों का भविष्य?
कोचिंग सील होने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक और छात्र मौके पर पहुंच गए। अपनी मेहनत की कमाई और बच्चों के साल बर्बाद होने के डर से पेरेंट्स बेहद परेशान दिखे। कई छात्रों का कहना था कि आखिर अंतिम समय में हम कहां जाएंगे? वहीं, प्रशासन का रुख एकदम सख्त है। उपायुक्त भुवन गुप्ता ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “बच्चों की जान से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोचिंग माफिया सुधर जाएं, अन्यथा इसी तरह का एक्शन हर उस सेंटर पर होगा जो नियमों को ठेंगा दिखाएगा।”
क्या है पूरा मामला?
फायर NOC गायब: अधिकांश सेंटरों के पास वैध फायर NOC नहीं थी।
एग्जिट गेट का अभाव: छात्रों की भीड़ के हिसाब से निकासी के पर्याप्त रास्ते नहीं थे।
सुरक्षा उपकरणों की कमी: अग्निशमन यंत्र या तो एक्सपायरी थे या काम नहीं कर रहे थे।
अभिभावकों के लिए सबक
यह घटना उन सभी पेरेंट्स के लिए एक आईना है जो महंगी फीस देकर अपने बच्चों को कोचिंग भेजते हैं। क्या आपने कभी यह देखा है कि जिस बिल्डिंग में आपका बच्चा पढ़ रहा है, वह सुरक्षित है या नहीं? प्रशासन का यह एक्शन सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोकने की एक पहल है।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ये कोचिंग संस्थान सभी सुरक्षा मापदंड पूरे नहीं करते, तब तक ताले नहीं खुलेंगे। एमपी नगर की गलियों में आज का यह सन्नाटा उन सभी के लिए एक चेतावनी है, जो शिक्षा के नाम पर सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं।
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