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आसमान से बरसी 'आफत' तो देवदूत बनकर उतरे जवान

27-05-2026  Editor Shubham Jain  15 views
आसमान से बरसी 'आफत' तो देवदूत बनकर उतरे जवान

भोपाल: कल्पना कीजिए, अचानक शहर में सायरन गूंजने लगे और आसमान से हवाई हमले का खतरा मंडराने लगे। ऐसी रूह कंपा देने वाली स्थिति में हमारी सेनाएं और आपदा प्रबंधन टीमें कैसे रिएक्ट करती हैं? इसी का सजीव और रोमांचक नजारा मंगलवार को भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय आवास परिसर में देखने को मिला।

एनडीआरएफ (NDRF), एसडीईआरएफ (SDERF) और होमगार्ड्स ने मिलकर एक ऐसा 'वॉर जोन' क्रिएट किया, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। यह कोई वास्तविक हमला नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किया गया एक संयुक्त मॉक अभ्यास था।

जब सायरन बजा और शुरू हुआ ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’

जैसे ही इमरजेंसी सायरन की गूंज परिसर में फैली, एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की टीमें अपने अत्याधुनिक साजो-सामान के साथ मैदान में उतर गईं। मॉक ड्रिल का परिदृश्य कुछ ऐसा था कि हवाई हमले के बाद बहुमंजिला इमारतों में आग लग गई है और लोग मलबे व ऊंची मंजिलों पर फंसे हुए हैं।

रोप रेस्क्यू का जलवा: बचाव दल के जवानों ने गगनचुंबी इमारतों से लोगों को निकालने के लिए 'रोप रेस्क्यू' तकनीक का इस्तेमाल किया।

हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म: ऊपरी मंजिलों पर फंसे नागरिकों को हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से सुरक्षित नीचे उतारा गया।

अग्निशमन की फुर्ती: दमकल की गाड़ियों ने कृत्रिम आग पर मिनटों में काबू पाकर अपनी दक्षता साबित की।

मेडिकल टीम ने बनाया ‘ग्रीन कॉरिडोर’

सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि घायलों को जीवनदान देने का भी अद्भुत प्रदर्शन हुआ। स्वास्थ्य विभाग और 108 एम्बुलेंस की टीमों ने मौके पर ही अस्थायी फील्ड हॉस्पिटल और मेडिकल ट्राइएज सेंटर तैयार किया।

सबसे खास बात यह रही कि गंभीर रूप से घायल (डमी) मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाने का अभ्यास किया गया, ताकि ट्रैफिक के बीच भी कीमती जान बचाई जा सके। पैरामेडिकल स्टाफ ने घायलों को प्राथमिक उपचार देने में गजब की फुर्ती दिखाई।

क्यों जरूरी है ऐसी 'मॉक ड्रिल'?

इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल (Coordination) को बढ़ाना है। आपदा के समय एक-एक सेकंड कीमती होता है, और यह ड्रिल सुनिश्चित करती है कि रिस्पांस टाइम कम से कम हो।

"इस तरह के अभ्यास से न केवल सिस्टम की कमियां दूर होती हैं, बल्कि आम जनता में भी सुरक्षा का भाव पैदा होता है। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।" — प्रशासनिक अधिकारी

नागरिकों को मिला सुरक्षा का ‘कवच’

अभ्यास के अंत में विशेषज्ञों ने स्थानीय निवासियों को हवाई हमले के दौरान ब्लैकआउट (बत्ती गुल करना), सुरक्षित शेल्टर होम का उपयोग और आपातकालीन किट तैयार रखने के टिप्स दिए। लोगों को बताया गया कि भगदड़ से बचकर कैसे अपनी और दूसरों की जान बचाई जा सकती है।

यह पूरी कवायद नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भोपाल की सड़कों पर तैनात इन 'वर्दीधारी नायकों' ने साबित कर दिया कि चाहे आफत जमीन से आए या आसमान से, वे हर चुनौती से टकराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


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