विदिशा। जिले के बासौदा क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला 28 सितंबर 2026 को बासौदा स्थित पॉक्सो न्यायालय में सुनाया गया। पुलिस के अनुसार प्रभावी विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।
प्रकरण में पुलिस ने घटना के बाद तेजी से जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान चिकित्सकीय परीक्षण, डीएनए जांच और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 16 गवाहों के बयान कराए गए, जबकि बचाव पक्ष ने 11 गवाह प्रस्तुत किए।
2025 में दर्ज हुआ था मामला
पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत 2 सितंबर 2025 को हुई थी। पीड़िता की मां ने थाना शहर बासौदा में लिखित आवेदन देकर घटना की जानकारी दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 640/25 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत प्रकरण की विवेचना शुरू की।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के दौरान उपलब्ध प्रत्येक महत्वपूर्ण साक्ष्य को संकलित किया। विवेचना में मौखिक, दस्तावेजी, भौतिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों को शामिल किया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों को बनाया जांच का आधार
पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मामले में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों के लिए डीएनए परीक्षण भी कराया गया। इसके अलावा पीड़िता और उसकी मां के भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की संबंधित धारा के तहत बयान दर्ज कराए गए।
जांच अधिकारियों ने घटना से जुड़े दस्तावेज, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य आधारित विवेचना पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ चालान न्यायालय में पेश किया गया।
एसडीओपी शिखा भलावी ने की विवेचना
प्रकरण की अनुसंधान एवं विवेचना एसडीओपी शिखा भलावी द्वारा की गई। पुलिस के अनुसार विवेचना पूरी होने के बाद सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
यह मामला जिला विदिशा के जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरणों की सूची में भी शामिल था। पुलिस और अभियोजन की ओर से मामले के शीघ्र निराकरण के लिए न्यायालयीन प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग किया गया।
कोर्ट में 27 गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 16 गवाहों के बयान कराए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से 11 गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
प्रेस नोट के अनुसार विचारण के दौरान मेडिकल साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट, मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों सहित अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया। अभियोजन पक्ष के तर्क और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को संबंधित धाराओं में दोषी माना।
20 साल का कठोर कारावास और अर्थदंड
अभियोजन अधिकारी एवं सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/एसपीओ दिनेश कुमार असैया के अनुसार बासौदा के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं पॉक्सो न्यायालय के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश राकेश कुमार ठाकुर की अदालत ने 28 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
न्यायालयीन प्रक्रिया में पुलिस ने किया सहयोग
पुलिस के अनुसार प्रकरण के शीघ्र निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों की ओर से समय-समय पर मार्गदर्शन दिया गया। न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान समंस और वारंट की तामीली तथा अन्य आवश्यक सहयोग में आरक्षक रीतेश तिवारी की भूमिका रही।
पुलिस ने बताया कि मामले में विवेचना के दौरान वैज्ञानिक और अन्य साक्ष्यों का संकलन कर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।
नाबालिग से जुड़े ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है। इसी कारण इस मामले में भी पीड़िता से संबंधित पहचान योग्य विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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