दतिया। मध्य प्रदेश की सियासत में 'हॉट सीट' मानी जाने वाली दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव का बिगुल बजते ही हलचल तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद दतिया की राजनीतिक गलियों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इस कदम ने विरोधियों के कान खड़े कर दिए हैं और चुनावी सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है।
नामांकन की प्रक्रिया और बढ़ता उत्साह
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, दतिया में उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होना है, जबकि नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया के तीसरे दिन बुधवार को दतिया कलेक्ट्रेट में काफी चहल-पहल देखी गई। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नामांकन पत्र खरीदने के साथ ही अब तक कुल 9 संभावित उम्मीदवार अपनी दावेदारी के लिए जरूरी दस्तावेज ले चुके हैं।
बुधवार को डॉ. मिश्रा के अलावा बालकिशन विश्वकर्मा (छतरपुर), वेदराम कुर्मी (दमोह) और हंशमुखी लोधी ने भी नामांकन पत्र खरीदे, जिससे चुनावी मुकाबले के रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं।
क्या है नरोत्तम मिश्रा का अगला दांव?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डॉ. मिश्रा का नामांकन पत्र खरीदना महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है कि वे दतिया के सियासी रण में फिर से ताल ठोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन डॉ. मिश्रा की सक्रियता यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी उन्हें लेकर क्या सोच रही है।
दतिया का चुनावी गणित
यह सीट राजेंद्र भारती की सदस्यता निलंबन के बाद खाली हुई है, जिसके बाद से ही दतिया में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर चल रहे हैं। एक ओर भाजपा जहाँ सत्ता और संगठन की ताकत के साथ बैठकें कर रही है, वहीं कांग्रेस भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
आगे क्या होगा?
13 जुलाई: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि।
14 जुलाई: नामांकन पत्रों की जांच।
16 जुलाई: नाम वापसी का अंतिम दिन।
दतिया के लोग अब इस बात पर नजरें टिकाए बैठे हैं कि आखिर मुख्य मुकाबला किसके बीच होगा। क्या डॉ. नरोत्तम मिश्रा फिर से दतिया का ताज पहनेंगे, या विपक्ष कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात तय है—दतिया का यह उपचुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने वाला है।
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