आगर-मालवा (नलखेड़ा): मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर, जो अपनी सिद्धी और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है, आज विवादों के भंवर में फंसी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के केंद्र इस मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर जो खुलासे हो रहे हैं, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। अब इस पूरे 'दान-खेल' की सच्चाई जानने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह 'एक्शन मोड' में आ गया है।
निजी खातों में क्यों जा रहा था भगवान का चढ़ावा?
माँ बगलामुखी मंदिर में देश-विदेश से भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं। मंदिर में सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर नकद राशि तक का भारी दान आता है। लेकिन, पिछले कुछ समय से मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। आरोप है कि मंदिर परिसर में एक 'गैर-शासकीय समिति' समानांतर रूप से सक्रिय थी, जो सरकारी प्रबंधन समिति से छिपकर या अलग होकर श्रद्धालुओं से नकद और कीमती चढ़ावा स्वीकार कर रही थी।
सबसे गंभीर आरोप निजी बैंक खातों के इस्तेमाल को लेकर है। मंदिर की तिजोरी में जानी चाहिए थी वह रकम, जो अब सीधे निजी खातों में जमा होने की बात सामने आई है। क्या आस्था के नाम पर कोई बड़ा सिंडिकेट चल रहा था? यह सवाल अब स्थानीय लोगों और भक्तों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
कलेक्टर की सख्ती: ‘सात दिन में दूध का दूध, पानी का पानी’
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर प्रीति यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है, जिसे इस पूरे वित्तीय जाल को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच समिति की कमान:
अध्यक्ष: बी.एस. सोलंकी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत)
सदस्य: मनीष सोलंकी (जिला कोषालय अधिकारी)
सदस्य: मिन्नी अग्रवाल (मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नलखेड़ा)
क्या-क्या खंगालेगी जांच टीम?
कलेक्टर ने जांच दल को 'ओपन एंडेड' अधिकार दिए हैं। समिति न केवल मंदिर परिसर का भौतिक निरीक्षण करेगी, बल्कि पिछले लंबे समय से चल रही दान व्यवस्था की भी बारीकी से पड़ताल करेगी। जांच के दायरे में निम्नलिखित बिंदु होंगे:
रसीदें और रजिस्टर: क्या मंदिर में मिलने वाले हर दान की रसीद काटी जा रही थी?
बैंक खातों का ऑडिट: निजी बैंक खातों में जमा की गई राशि का स्रोत क्या है और वह किसके पास गई?
स्वर्ण-रजत का हिसाब: मंदिर में चढ़ने वाले सोने-चांदी के आभूषणों का स्टॉक रजिस्टर और वास्तविकता का मिलान।
संदिग्धों की भूमिका: क्या मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी अधिकारी या कर्मचारी ने मिलीभगत की है?
आस्था बनाम अनियमितता: क्या निकलेगा नतीजा?
सात दिनों का समय बेहद कम होता है, लेकिन जांच टीम की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि जल्द ही परतें खुलेंगी। माँ बगलामुखी के दरबार में भक्त अपना सब कुछ अर्पण कर देते हैं, लेकिन अगर उस चढ़ावे का इस्तेमाल भगवान की सेवा की जगह किसी की तिजोरी भरने में हुआ है, तो यह अक्षम्य अपराध है।
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं। क्या यह केवल प्रबंधन की लापरवाही है या फिर आस्था की आड़ में रचा गया कोई बड़ा भ्रष्टाचार? सच जो भी हो, नलखेड़ा की शांत फिजाओं में इस विवाद ने हलचल मचा दी है।
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