सीधी, मध्य प्रदेश: भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी एक बानगी आज सीधी तहसील कार्यालय में देखने को मिली। रीवा लोकायुक्त टीम ने एक धाकड़ कार्रवाई करते हुए नामांतरण (Mutation) के बदले 3,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए तहसील के माल जमादार दामोदर साकेत को रंगे हाथों दबोच लिया। लोकायुक्त की इस दबिश से सीधी तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच हड़कंप की स्थिति है।
चार महीने से काट रहे थे दफ्तर के चक्कर
मिली जानकारी के अनुसार, फरियादी नागेंद्र प्रसाद तिवारी पिछले चार महीनों से अपने नामांतरण के काम के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। सरकारी नियमों और फाइलों के बीच उलझे नागेंद्र को बार-बार दफ्तर बुलाया जा रहा था, लेकिन काम होने का नाम नहीं ले रहा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात माल जमादार दामोदर साकेत से हुई।
आरोप है कि दामोदर साकेत ने काम आसान करने के बदले 3,000 रुपये की 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) की मांग की। फरियादी ने पैसे देने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिखाया और सीधे रीवा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर इसकी शिकायत दर्ज कराई।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल, और फंस गया ‘शिकारी’
शिकायत मिलने के बाद रीवा संयुक्त लोकायुक्त की टीम ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक सटीक योजना बनाई। भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर करने के लिए टीम ने ट्रैप का जाल बिछाया। आज सुबह जैसे ही फरियादी नागेंद्र प्रसाद तिवारी ने तहसील कार्यालय के पास दामोदर साकेत को 3,000 रुपये की रिश्वत सौंपी, पहले से ही सादी वर्दी में तैनात लोकायुक्त की टीम ने आरोपी को रंगे हाथों धर दबोचा।
कार्रवाई से थर्राया तहसील प्रशासन
लोकायुक्त इंस्पेक्टर नरेश मेहरा के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने सीधी प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद आरोपी को सीधी स्थित उच्च विश्राम गृह ले जाया गया, जहाँ विस्तृत पूछताछ और कागजी कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना के बाद आम जनता में एक संदेश गया है कि भ्रष्टाचार चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, अब लोकायुक्त की नजरों से बचना मुश्किल है। प्रशासनिक गलियारों में दबी जुबान से चर्चा है कि इस कार्रवाई से उन तमाम कर्मचारियों को सबक मिलेगा, जो जनता के वाजिब कामों के लिए घूसखोरी का सहारा लेते हैं।
'विदिशा भारती' की अपील
भ्रष्टाचार मुक्त समाज की नींव हम सब मिलकर रख सकते हैं। यदि आपके साथ भी सरकारी कार्यालयों में काम के बदले पैसे मांगे जाते हैं, तो चुप न बैठें। सीधे लोकायुक्त या सतर्कता विभाग में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आपकी एक शिकायत किसी बड़े भ्रष्टाचार को रोकने में मददगार साबित हो सकती है।
सीधी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए बने रहिए 'विदिशा भारती' के साथ। हम सच की आवाज को आप तक पहुंचाना जारी रखेंगे।
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