भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की राजनीतिक नैया मझधार में फंसती नजर आ रही है। बैंक फ्रॉड मामले में सजायाफ्ता भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिलने की जो आखिरी उम्मीद थी, वह भी मंगलवार को धुंधली पड़ गई। कोर्ट ने सुनवाई को 14 जुलाई तक के लिए टाल दिया है, जिसके बाद दतिया में उपचुनाव की आहट तेज हो गई है।
तीसरी बार टली सुनवाई: भारती खेमे में छाई मायूसी
राजेंद्र भारती ने दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्हें उम्मीद थी कि शीघ्र सुनवाई से उनकी सजा पर रोक लग जाएगी और उनकी विधायकी बहाल हो सकती है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में अन्य प्राथमिकता वाले मामलों की लंबी लिस्ट के कारण भारती के केस का नंबर आने से पहले ही समय समाप्त हो गया। लगातार तीसरी बार सुनवाई टलने से न केवल भारती समर्थक निराश हैं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी अब 'प्लान-बी' पर चर्चा शुरू हो गई है।
क्यों फंसा है पेंच? समझिए पूरा मामला
राजेंद्र भारती की मुश्किलें 2 अप्रैल को तब शुरू हुईं जब दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें बैंक फ्रॉड मामले में 3 साल की सजा सुनाई। कानून के मुताबिक, 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलते ही जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।
विधायकी गई: विधानसभा सचिवालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया।
आयोग को सूचना: सीट खाली होने की आधिकारिक सूचना चुनाव आयोग को भेजी जा चुकी है।
कठिन राह: कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक अपराधों में कोर्ट से तत्काल स्टे मिलना 'टेढ़ी खीर' है।
दतिया में उपचुनाव की उल्टी गिनती शुरू!
एक तरफ कोर्ट में तारीख पर तारीख मिल रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन 'चुनावी मोड' में आ चुका है। सूत्रों के मुताबिक, दतिया जिला प्रशासन ने उपचुनाव की तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी कर ली हैं।
बड़ी अपडेट: दतिया कलेक्टर ने 25 मई को ही चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजकर यह स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन मतदान कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब बस दिल्ली से 'तारीखों के ऐलान' का इंतजार है।
सियासी गलियारों में हलचल: कौन होगा अगला दावेदार?
राजेंद्र भारती की उम्मीदें टूटने के बाद अब दतिया का सियासी पारा चढ़ गया है। बीजेपी इस मौके को भुनाने की ताक में है, वहीं कांग्रेस के लिए यह सीट बचाना साख की लड़ाई बन गई है। यदि 14 जुलाई तक कोर्ट से कोई चमत्कारिक राहत नहीं मिलती, तो भारती इस चुनावी दौड़ से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे।
क्या दतिया की जनता एक बार फिर नए चेहरे पर भरोसा करेगी या सहानुभूति की लहर कांग्रेस के काम आएगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल 'भारती का किला' दरकता नजर आ रहा है।
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