सांची/सलामतपुर: प्रदेश में गेहूं की फसल तो लहलहा गई, लेकिन खरीदी केंद्रों पर दाने-दाने के लिए किसान दर-दर भटकने को मजबूर है। सांची ब्लॉक के सलामतपुर (त्रिमूर्ति चौराहा) पर आज किसानों के सब्र का बांध टूट गया। किसान जागृति संगठन के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने चक्काजाम कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक भोपाल-विदिशा मार्ग पूरी तरह ठप रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
क्यों सुलग रहा है किसानों का गुस्सा?
किसानों का आरोप है कि समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। चक्काजाम के दौरान किसानों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याएं गिनाईं:
बारदाना संकट: खरीदी केंद्रों पर बारदाना उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण किसान अपनी ट्राली लेकर कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं।
स्लॉट बुकिंग का झंझट: वेयरहाउस फुल होने के कारण किसानों के स्लॉट कैंसिल हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पोर्टल पर 'स्लॉट कैंसिल' का विकल्प ही नहीं आ रहा, जिससे किसान अधर में लटके हैं।
सुविधाओं का अभाव: भीषण गर्मी के बावजूद केंद्रों पर पीने के साफ पानी और बैठने के लिए छाँव तक की व्यवस्था नहीं है।
तौल में हेरा-फेरी: किसानों ने आरोप लगाया कि तौल कांटों में गड़बड़ी कर उनकी मेहनत की कमाई पर डाका डाला जा रहा है।
दिग्गज किसान नेताओं ने संभाली कमान
दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक चले इस प्रदर्शन में किसान जागृति संगठन के आला नेता मैदान में उतरे। संगठन की प्रमुख इरफान जाफरी, प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र कुमार (रज्जू भैया), जिला अध्यक्ष रंजीत यादव और तहसील अध्यक्ष ठाकुर राजेंद्र सिंह राजपूत ने संयुक्त रूप से कहा कि जब तक किसानों की समस्याएं हल नहीं होतीं, आंदोलन थमेगा नहीं।
“किसान अपना खून-पसीना एक करके अन्न उपजाता है, लेकिन मंडी और खरीदी केंद्रों पर उसे भिखारी की तरह खड़ा रहना पड़ता है। न पानी है, न छाँव और ऊपर से तौल में चोरी—यह अब बर्दाश्त नहीं होगा।”
— किसान नेता, चक्काजाम के दौरान
इन गांवों से उमड़ा किसानों का हुजूम
इस चक्काजाम में केवल सलामतपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के किसान शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से:
ढकना, मेढकी, तिजलपुर, बागौद, सेवासनी, दीवानगंज, सेमरा, कच्नारिया, जमुनिया पैमद, मानपुर, बरनीजागीर, पौहरा, बरोला, कटसारी, चपना, राता तलाई, हिनोतिया, शाहपुर और पगनेश्वर के किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे।
प्रदर्शन में ये रहे मौजूद
आंदोलन में विजय चौकसे, महासचिव रामस्वरूप राठौर, ईशाहक अली खान, नारायण सिंह राजपूत, जमुना लोधी, हेमंत सिंह मीणा, ठाकुर उपेंद्र प्रताप सिंह 'गोलू', रईश मोहम्मद और सैकड़ों अन्य किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रशासनिक अमले में हड़कंप
चक्काजाम की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने किसानों को समझा-बुझाकर और व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। हालांकि, किसानों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बारदाना और स्लॉट की समस्या हल नहीं हुई, तो आंदोलन और भी उग्र होगा।
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