नरेंद्र प्रताप सिंह गंजबासौदा (विदिशा)। जिंदगी की शाम ढलने को है, शरीर साथ नहीं दे रहा और जिम्मेदारियां अब अपनों के कंधों पर हैं। ऐसे पड़ाव पर जहां सम्मान और सुकून की दरकार थी, वहां विदिशा जिले के गंजबासौदा में बुजुर्ग पेंशनर्स को अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन की स्थानीय इकाई ने अब सरकार के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है।
दफ्तरों के चक्कर काटते ‘वृद्ध योद्धा’
दोपहर का वक्त था, चिलचिलाती धूप और उम्र के भारीपन के बावजूद पेंशनर्स का कारवां एसडीएम कार्यालय पहुँचा। यह महज भीड़ नहीं थी, बल्कि उन हजारों अनुभवी चेहरों का आक्रोश था जिन्होंने अपनी पूरी जवानी सरकारी सेवा में खपा दी। मध्य प्रदेश प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन के तहसील अध्यक्ष रमेश जाट के नेतृत्व में पहुंचे इन बुजुर्गों के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। इनका कहना है कि “हमने सेवाकाल में फाइलों को सुलझाया, लेकिन आज हम खुद एक फाइल बनकर दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं।”
क्या हैं वे 3 बड़े मुद्दे जो बन गए हैं 'नासूर'?
पेंशनर्स एसोसिएशन ने एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में अपनी तीन प्रमुख मांगों को रेखांकित किया है, जो उनकी आर्थिक कमर तोड़ रही हैं:
महंगाई राहत (Dearness Relief) की मार: केंद्र सरकार जब महंगाई राहत की घोषणा करती है, तो उसका लाभ पेंशनर्स को मिलने में महीनों का समय लग जाता है। समय पर DR न मिलने से बुजुर्गों का मासिक बजट पूरी तरह डगमगा गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का छलावा: उम्र के इस पड़ाव पर बीमारियों का डेरा स्वाभाविक है। बावजूद इसके, सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ और चिकित्सा सुविधाओं का टोटा इन पेंशनर्स को मानसिक रूप से तोड़ रहा है।
वेतनवृद्धि (Increment) पर अधिकारियों की 'मनमानी': वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को एक वेतनवृद्धि का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन विभागों के बाबू और अधिकारी फाइलों को दबाकर बैठे हैं, जिससे सैकड़ों रिटायर्ड कर्मचारी अपने हक से वंचित हैं।
आर-पार की लड़ाई: 20 जून से शुरू होगा ‘181 का महा-अभियान’
अब पेंशनर्स एसोसिएशन ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को ठंडे बस्ते में डाला गया, तो 20 जून से एक बड़ा 'डिजिटल विद्रोह' शुरू होगा। इस दिन पूरे प्रदेश के पेंशनर्स मुख्यमंत्री हेल्पलाइन '181' पर एक साथ अपनी शिकायतें दर्ज कराएंगे। यह 'महा-अभियान' सरकार के सिस्टम पर सीधा प्रहार होगा, ताकि सोए हुए अधिकारी जाग सकें और बुजुर्गों को उनका हक मिल सके।
क्या सरकार समय रहते इन अनुभवी चेहरों की सुध लेगी? या फिर उन्हें अपनी अंतिम लड़ाई सड़क पर ही लड़नी पड़ेगी? विदिशा भारती इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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