आगर मालवा | विदिशा भारती न्यूज़ डेस्क
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले की सियासत में शनिवार को एक ऐसा बड़ा भूचाल आया, जिसने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और स्थानीय प्रशासन के बीच मचे घमासान को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। आगर मालवा नगर पालिका के बीजेपी समर्थित अध्यक्ष नीलेश पटेल, 10 पार्षदों और 3 एल्डरमैन ने एक साथ अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस अचानक हुए घटनाक्रम से पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
राजस्व विभाग और पटवारियों पर गंभीर आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने इस्तीफे बीजेपी जिला महामंत्री के जरिए जिलाध्यक्ष और जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान को भेज दिए हैं।
इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह प्रशासनिक तानाशाही और राजस्व विभाग की मनमानी बताई जा रही है। नपा अध्यक्ष और पार्षदों का सीधा आरोप है कि:
राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी और पटवारी शहर में हो रहे विकास कार्यों में लगातार अड़ंगे लगा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और खुद नगर पालिका अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है।
चुनी हुई सरकार के प्रतिनिधियों को बार-बार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
शहर के विकास में आ रही रुकावटों और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से नाराज होकर जनप्रतिनिधियों ने यह बड़ा कदम उठाया है।
संगठन का मुहर, तो मंत्री बोले— 'सिर्फ अफवाह'!
इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब बीजेपी संगठन और सरकार के बयानों में ही विरोधाभास देखने को मिला।
एक तरफ भाजपा जिला महामंत्री मयंक राजपूत ने मीडिया से बातचीत करते हुए सामूहिक इस्तीफे की बात स्वीकार की और जनप्रतिनिधियों द्वारा राजस्व अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि की। वहीं दूसरी तरफ, जिले के प्रभारी मंत्री नागर सिंह चौहान ने पूरे मामले पर अनभिज्ञता जताते हुए इसे महज एक "अफवाह" करार दे दिया। मंत्री का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक या लिखित जानकारी नहीं मिली है।
दूसरी ओर, घटनाक्रम के बाद से ही नगर पालिका अध्यक्ष नीलेश पटेल और अन्य नाराज पार्षदों से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
प्रशासनिक व्यवस्था और सियासत पर उठे बड़े सवाल
आगर मालवा का यह पूरा घटनाक्रम अब केवल एक राजनीतिक ड्रामा नहीं रह गया है, बल्कि इसने प्रशासन और जनता के प्रतिनिधियों के बीच गिरते तालमेल की भी पोल खोलकर रख दी है।
यदि जनप्रतिनिधियों के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर राजस्व विभाग की बेलगाम कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढिलाई पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। आखिर पटवारी और कर्मचारी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों पर इतने हावी कैसे हो सकते हैं? वहीं, अगर इस्तीफे का यह पूरा मामला मंत्री जी के दावों के मुताबिक सिर्फ एक अफवाह है, तो फिर बीजेपी संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान की असलियत सामने आना भी बेहद जरूरी है।
फिलहाल, आगर मालवा की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। चाय की दुकानों से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक सिर्फ इसी घटनाक्रम की चर्चा है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी संगठन इस अंदरूनी असंतोष की आग को कैसे बुझाता है और प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।
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