कटनी/विजयराघवगढ़: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक अत्यंत दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। विजयराघवगढ़ थाना क्षेत्र में द्वारिका स्कूल की चलती तूफान वैन का दरवाजा अचानक खुल जाने से कक्षा तीसरी का 10 वर्षीय छात्र चलती गाड़ी से सीधे पक्की सड़क पर जा गिरा। हादसे में गंभीर रूप से घायल मासूम ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस भयानक दुर्घटना के बाद से मृतक बच्चे के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक और गमगीन माहौल बना हुआ है।
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🏫 छुट्टी के बाद रोज की तरह घर लौट रहा था मासूम जीत
प्राप्त विस्तृत जानकारी के मुताबिक, विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम टीकर निवासी दिनेश यादव का 10 वर्षीय पुत्र जीत यादव स्थानीय द्वारिका स्कूल में कक्षा तीसरी का छात्र था। घटना वाले दिन वह रोजाना की भांति अपनी पढ़ाई पूरी करके स्कूल की तूफान वैन में सवार होकर घर लौट रहा था।
सफर के दौरान जैसे ही वैन रास्ते से गुजर रही थी, अचानक वैन का पिछला/साइड का दरवाजा अनियंत्रित होकर खुल गया। गाड़ी की रफ्तार तेज होने के कारण जीत खुद को संभाल नहीं सका और चलती वैन से छिटककर सड़क पर जा गिरा। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आने के कारण मासूम लहूलुहान होकर अचेत हो गया।
🏥 चीख-पुकार के बीच अस्पताल पहुंचे राहगीर, डॉक्टरों ने घोषित किया मृत
हादसा होते ही वैन में मौजूद अन्य बच्चों और राहगीरों में चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने तत्परता एवं मानवता दिखाते हुए तुरंत खून से लथपथ पड़े मासूम को उठाया और नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाया।
हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे का त्वरित परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही मासूम जीत की मौत की आधिकारिक खबर परिजनों तक पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां-बाप और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
⚠️ सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस दरकिनार: अभिभावकों का आक्रोश फूटा
इस हृदयविदारक हादसे ने एक बार फिर स्कूली बच्चों के परिवहन और निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और आक्रोशित अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन तथा परिवहन विभाग के खिलाफ जमकर गुस्सा जाहिर किया है।
अभिभावकों के मुख्य आरोप:
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: निजी शिक्षण संस्थानों और वाहन चालकों द्वारा स्कूली वाहनों के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा निर्धारित कड़े सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मजबूत लॉक सिस्टम व अटेंडेंट का अभाव: गाड़ियों में न तो चाइल्ड लॉक या मजबूत लॉक सिस्टम दुरुस्त रहता है और न ही बच्चों की देखभाल के लिए किसी प्रशिक्षित परिचालक (अटेंडेंट) की तैनाती की जाती है।
ओवरलोडिंग और अनफिट वाहन: क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरना और बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खटारा वाहनों का सड़कों पर दौड़ना आम बात हो चुका है, जिस पर जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
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👮♂️ पुलिस जांच में जुटी, होगी सख्त वैधानिक कार्रवाई
दर्दनाक घटना की सूचना मिलते ही विजयराघवगढ़ थाना पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर मर्ग कायम कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का बयान:
पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की बेहद गहनता और गंभीरता से जांच की जा रही है। वाहन चालक की लापरवाही, वाहन के फिटनेस व परमिट दस्तावेज और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान इस तरह न जाए।
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