सत्यम यादव शमशाबाद/पिपलधार। शमशाबाद तहसील अंतर्गत पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपलधार में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि विद्यालय के जिस भवन को प्रभारी प्राचार्य कृष्णकांत महावर ने क्षतिग्रस्त बताया है, उसी भवन में छात्र-छात्राओं की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इस स्थिति ने विद्यालय प्रबंधन, शिक्षा विभाग और विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि भवन की संरचनात्मक स्थिति खराब है और वहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं, तो विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर भवन की वास्तविक स्थिति और उसे उपयोग के लिए सुरक्षित घोषित किए जाने संबंधी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
प्रभारी प्राचार्य के बयान से उठे सवाल
मामले का मुख्य बिंदु विद्यालय भवन की स्थिति से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार प्रभारी प्राचार्य कृष्णकांत महावर ने भवन को क्षतिग्रस्त बताया है। इसके बावजूद उसी भवन में कक्षाएं लगने की बात सामने आई है।
यदि किसी भवन को विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित या क्षतिग्रस्त माना गया है, तो ऐसे भवन में कक्षाएं संचालित करने से पहले उसकी सुरक्षा स्थिति का तकनीकी परीक्षण जरूरी हो जाता है। इसी कारण अभिभावक और स्थानीय लोग शिक्षा विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों के बीच भी इस मामले को लेकर चिंता बताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है। यदि विद्यालय प्रबंधन स्वयं भवन की स्थिति को लेकर चिंता जता चुका है, तो विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित कक्षाओं की व्यवस्था होनी चाहिए।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग को मौके की स्थिति का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए। साथ ही यदि भवन विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित नहीं है, तो वैकल्पिक कक्षाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हादसे से पहले जांच की मांग
क्षतिग्रस्त भवन में विद्यार्थियों के बैठने की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भवन का निरीक्षण कराने की मांग उठ रही है। भवन की मजबूती, छत, दीवारों, फर्श और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की तकनीकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे मामलों में केवल मौखिक जानकारी के आधार पर भवन को सुरक्षित या असुरक्षित मानना उचित नहीं होगा। संबंधित तकनीकी विभाग या सक्षम अधिकारी द्वारा निरीक्षण और रिपोर्ट के बाद ही भवन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर निगाह
मामले में अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय अधिकारियों द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किया जाता है तो भवन की स्थिति, कक्षाओं के संचालन और विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तथ्य सामने आ सकते हैं।
यदि जांच में भवन विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित पाया जाता है, तो कक्षाओं को दूसरे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की आवश्यकता होगी। वहीं यदि तकनीकी जांच में भवन सुरक्षित पाया जाता है, तो विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल विद्यार्थियों की सुरक्षा और जिम्मेदारी से जुड़ा है। यदि क्षतिग्रस्त भवन में कक्षाएं संचालित होने की बात सही पाई जाती है और भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय करने का प्रश्न उठेगा। इसलिए किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही भवन की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भवन की स्थिति को लेकर शिकायत या चिंता सामने आने पर समय रहते निरीक्षण और आवश्यक कदम उठाने से जोखिम कम किया जा सकता है।
आधिकारिक जांच से साफ होगी तस्वीर
पिपलधार के पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा यह मामला फिलहाल सामने आई जानकारी और आरोपों पर आधारित है। भवन की वास्तविक स्थिति, कक्षाओं के संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर अंतिम स्थिति सक्षम अधिकारी की जांच और तकनीकी रिपोर्ट से स्पष्ट होगी।
अब स्थानीय अभिभावकों और विद्यार्थियों की नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी विद्यालय पहुंचकर भवन का निरीक्षण करें और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लें।
विदिशा भारती की अपील: यदि विद्यालय भवन को लेकर कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट, विभागीय आदेश या तकनीकी प्रमाण उपलब्ध है, तो उसके आधार पर मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट रूप से सामने लाई जा सकती है।
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