गाडरवारा/विदिशा भारती: मध्य प्रदेश के गाडरवारा में आज का सूरज किसानों के आक्रोश के साथ निकला। राष्ट्रीय किसान आर्मी के बैनर तले सैकड़ों किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर उतर आए और सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी। कृषि उपज मंडी से एसडीएम कार्यालय तक निकाली गई यह आक्रोश रैली किसी ट्रेलर से कम नहीं थी, क्योंकि किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अगला पड़ाव भोपाल की गलियां और दिल्ली की सीमाएं होंगी।
'मूंग' पर फंसा है पेंच
किसानों के इस गुस्से की सबसे बड़ी वजह है— मूंग की खरीद। प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि उन्हें उनकी मेहनत का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उनकी मांग है कि सरकार मूंग की 100% सरकारी खरीद सुनिश्चित करे। बाजार में बिचौलियों के कारण किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं, जबकि वे समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरा हक चाहते हैं।
एसडीएम कार्यालय के बाहर 'टेंशन' का माहौल
प्रदर्शन के दौरान एसडीएम कार्यालय परिसर में माहौल काफी गरमाया रहा। एक तरफ किसानों की नारेबाजी से पूरा परिसर गूंज रहा था, तो दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। किसानों के जज्बे को देखते हुए मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात रहा। गहमागहमी के बीच किसानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
क्या हैं किसानों की 10 प्रमुख मांगें?
किसानों ने केवल मूंग ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी कई अन्य समस्याओं को भी ज्ञापन का हिस्सा बनाया है। इनमें प्रमुख मांगें हैं:
मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की गारंटी।
फसलों का उचित और लाभकारी समर्थन मूल्य।
कृषि उपज मंडी में किसानों की सुविधाओं का विस्तार।
खाद-बीज की किल्लत और कालाबाजारी पर रोक।
सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की आपूर्ति।
प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों का त्वरित मुआवजा।
किसानों के पुराने कर्ज पर ब्याज माफी।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा।
किसान हितैषी सरकारी योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन।
सरकार को दी 'दिल्ली कूच' की चेतावनी
राष्ट्रीय किसान आर्मी के पदाधिकारियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि, "हमने प्रशासन को ज्ञापन देकर अपनी बात रखी है, लेकिन यह हमारी अंतिम चेतावनी है।" किसानों का कहना है कि सरकार यदि उनकी मांगों को हल्के में ले रही है, तो यह उसकी भूल है। अगर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो किसान अपना घर-खेत छोड़कर भोपाल और दिल्ली के रास्तों पर डेरा डालने के लिए मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि क्या सरकार इस महाप्रदर्शन के बाद जागती है या अन्नदाताओं का यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगा। विदिशा भारती इस आंदोलन की पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।
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