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जब लोकतंत्र हुआ था कैद: विदिशा में 'संविधान हत्या दिवस' पर याद किया गया

25-06-2026  Vidisha Raghvendra dangi  64 views
जब लोकतंत्र हुआ था कैद: विदिशा में 'संविधान हत्या दिवस' पर याद किया गया

आकाश धाकड़ विदिशा। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख एक ऐसे 'काले अध्याय' के रूप में दर्ज है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसी दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र की हत्या करने का दुस्साहस किया था। इसी भयावह याद को संजोने और आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की कीमत बताने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के आह्वान पर, आज विदिशा जिला भाजपा कार्यालय में 'संविधान हत्या दिवस' का आयोजन किया गया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वे वीर मीसा बंदी रहे, जिन्होंने देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए यातनाओं का सामना किया। इस दौरान इन लोकतंत्र सेनानियों का शॉल और श्रीफल भेंट कर भव्य सम्मान किया गया।

वह खौफनाक मंजर: जब घरों से उठा लिए गए थे निर्दोष

कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा करते हुए मीसा बंदियों बाबू लाल ताम्रकार, रमन गोयल, गोवर्धन साहू, राजकुमार शर्मा, राजाबाबू मोघे और इमरतलाल यादव ने बताया कि 25 जून 1975 की रात देश के लिए किसी डरावने सपने जैसी थी। उन्होंने बताया, “तत्कालीन सरकार ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। बिना किसी अपराध, बिना किसी वारंट के रातों-रात हमें घरों से उठा लिया गया। जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया, ताकि वैचारिक स्वतंत्रता का गला घोंटा जा सके।”

इन बंदियों ने बताया कि तमाम यातनाओं और जेल की सलाखों के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ, क्योंकि उनके मन में देश में लोकतंत्र को फिर से बहाल करने का संकल्प था।

कांग्रेस की तानाशाही पर प्रहार

समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आपातकाल के दौर पर तीखे प्रहार किए। विदिशा विधायक मुकेश टंडन ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला पन्ना है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को जेलखाने में तब्दील कर दिया था।”

प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह याद दिलाना बहुत जरूरी है कि संविधान की वास्तविक हत्या किसने की थी। जिला महामंत्री बलवीर रघुवंशी ने आपातकाल में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन और न्यायपालिका पर प्रहार को याद किया।

वहीं, जिला मीडिया प्रभारी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल जैन ने मीडिया पर हुए अत्याचारों को याद करते हुए बताया कि उस दौर में प्रेस पर सेंसरशिप थोप दी गई थी। सच्चाई बाहर न आए, इसलिए अखबारों के दफ्तरों तक की बिजली काट दी गई थी।

लोकतन्त्र बचाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी ने लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष संदीप डोंगर सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में बलवीर रघुवंशी, पंकज पांडे, संतोष शर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश शर्मा, मुकेश चौकसे, कृष्ण कुमार गुप्ता, अरविंद श्रीवास्तव, उदय ढोली, सुनील साहू, संतोष पेंटर, लियाकत खान, पप्पू सरदार, रविन्द्र रघुवंशी, यशवंत चौहान, अरुण सोनी, वरिष्ठ भाजपा नेता, विभिन्न मोर्चा अध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

यह आयोजन इस बात की याद दिलाता है कि लोकतंत्र कोई उपहार नहीं, बल्कि इसे संजोए रखने के लिए सतत संघर्ष की आवश्यकता है।


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