गिरीडीह। तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी की पावन धरा स्थित 'गुणायतन' इन दिनों भक्ति के महासागर में गोते लगा रहा है। राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज के मंगल सानिध्य में छह दिवसीय 'श्री 1008 जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव' का गुरुवार को भव्य और मंगलकारी शुभारंभ हुआ। ध्वजारोहण और मंडप उद्घाटन के साथ शुरू हुए इस महाआयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा भर दी, बल्कि आत्म-कल्याण का एक नया मार्ग भी प्रशस्त किया।
घटयात्रा से गूंजी समवेत शिखर की धरा
महोत्सव की शुरुआत पारसधाम मंदिर से निकली भव्य घटयात्रा के साथ हुई। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच निकली यह यात्रा जब गुणायतन परिसर पहुंची, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मुख्य ध्वजारोहण और मंडप उद्घाटन का सौभाग्य सुनीता दीदी बासा तथा कानपुर के गुरुभक्त कत्थावाला परिवार को प्राप्त हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
“पंचकल्याणक केवल उत्सव नहीं, आत्म-परिवर्तन का माध्यम है”
अपने मंगल प्रवचन में राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने पंचकल्याणक के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा, "पंचकल्याणक सिर्फ भगवान के जीवन की घटनाओं का दोहराव नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा बनाने की एक वैज्ञानिक साधना है।" मुनिश्री ने आगे कहा कि गर्भ, जन्म, तप, केवलज्ञान और मोक्ष—ये पाँचों कल्याणक हमें सिखाते हैं कि कैसे एक साधारण मानव अपने पुरुषार्थ से 'जिन' (विजेता) बन सकता है।
क्या आप भी हैं धन की अंधी दौड़ में? मुनिश्री की दो टूक
मुनिश्री ने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और धर्म से बढ़ती दूरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "आज इंसान धन कमाने के चक्कर में पूजा, स्वाध्याय और सामायिक को पीछे छोड़ रहा है। याद रखिए, धन जीवन जीने का साधन है, साध्य नहीं।" उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी निर्लिप्त रहता है, वैसे ही धन और वैभव के बीच रहकर भी व्यक्ति को भगवान की तरह अनासक्त रहना सीखना चाहिए।
मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस महोत्सव में केवल एक दर्शक या अतिथि बनकर न आएं, बल्कि स्वयं को तीर्थंकर भगवान के पंचकल्याणक का सहभागी मानकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकल्प लें।
अब आगे क्या?
गुणायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया और उनकी टीम के कुशल निर्देशन में सभी धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई जा रही हैं। शुक्रवार (26 जून) को गर्भ कल्याणक की उत्तरार्ध क्रियाएं होंगी, जिसमें माता मरुदेवी के 16 स्वप्नों का दिव्य फल प्रदर्शित किया जाएगा।
क्या आप भी बनना चाहते हैं इस महायज्ञ का हिस्सा?
गुणायतन में चल रहा यह आयोजन हर उस व्यक्ति के लिए एक अवसर है, जो अपने भीतर के 'नर' को 'नारायण' में बदलना चाहता है। यदि आप भी धर्म और शांति की तलाश में हैं, तो इस आध्यात्मिक महाकुंभ में शामिल होकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
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